प्रश्नोत्तर P3-0067 · भाग 3
दूर बैठे साधक गलतियां कैसे स्वीकारें जब गुरु पास न हों? बंधन क्या?
खुद स्वीकार करो — बहुत गलतियां; नहीं होती तो उस स्थिति में होते। सत्संग से धीरे कल्याण; समय मिले एक महीना पक्का। स्वीकार नहीं तो आगे नहीं। बंधन पकड़ो — राग-द्वेष-मोह-आसक्ति-इच्छा-अपेक्षा-कर्ता; लेन-देन; आश्वासन। आवेश में वादा — मैं को खड़ा करने दम कामनाओं में लगाया। अभी से पूरी तरह आओ — उम्र लंबी हो तो भी।
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वीडियो: पार्ट 1 कैसे कहूं ,तेरी कृपा भी नहीं चाहिए ? योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-03