प्रश्नोत्तर P30-0018 · भाग 30
गुरु जी, अंतःकरण क्या है, इसका क्या कार्य है और यह कहां स्थित है? इसके बारे में कुछ प्रकाश डालिए।
अंतःकरण का मतलब — आप कारण में जी रहे हैं, तो कारण से जो आप इकट्ठा कर रहे हैं वह अंतःकरण में जा रहा है। जब आप कारण में जी रहे हैं तो कारण शरीर है; उस कारण शरीर के अंदर अंतःकरण बना है, उसमें सब आप भर रहे हैं — कब तक? जब तक आप कारण में जिएंगे। कारण से हट जाएंगे तो कारण शरीर भी हट जाएगा, अंतःकरण भी सब खत्म हो जाएगा। इसका कार्य क्या है? कारण में जी रहे हो, कामनाओं की पूर्ति कर रहे हो। इच्छा-अपेक्षा से कारण शरीर तैयार हुआ, और जैसे ही आप इच्छा-अपेक्षा में गए, कारण शरीर बन गया; उस कारण शरीर में आप जो भी कर रहे हैं वो जमा हो रहा है — उसे अंतःकरण कहते हैं। अंतरात्मा अलग है, वो सबसे पीछे है। अब उस शरीर का नाश कैसे होगा? जब आप इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो जाएंगे तो वो शरीर तुरंत खत्म हो जाएगा, और अंतःकरण में जितना है सब खत्म हो जाएगा। इच्छा क्या है? योग्यता से ज्यादा चाहिए — ये इच्छा है। अपेक्षा क्या है? मैंने किसी के लिए किया तो उम्मीद बना के रखी कि मेरे लिए भी यह करेगा। यही सुख भी देता है, यही दुख भी देता है। बाकी अंतःकरण के बारे में सोचो ही मत, आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है; बस आप इच्छा और अपेक्षा से अपने आप को मुक्त करा लो, सब अपने आप खत्म हो जाएगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: अंतःकरण क्या है कहां स्थित है और क्या कार्य है ? #yogijikasatsang #live_satsang #Aadhyatmik · 2024-12-04