प्रश्नोत्तर P30-0019 · भाग 30
गुरु जी, पहले इच्छा-अपेक्षा प्रकट हुई और फिर जीव, या पहले जीव प्रकट हुआ और बाद में इच्छा-अपेक्षा?
जैसे ही एक तरफ इच्छा-अपेक्षा का भाव बन रहा है, जीव पैदा हो गया। जीव इच्छा-अपेक्षा से आत्मा से बन रहा है; मूल तो आत्मा है, पीछे तो आत्मा है। पानी ही बर्फ बन रहा है, बर्फ ही आइसक्रीम बन रहा है, लेकिन पीछे मूल पानी है — स्वाद के चक्कर में बर्फ आइसक्रीम बन गया, स्वाद के चक्कर में तुमने कारण शरीर धारण किया। पहले उसका एक ही कलर था, अब अनेक कलर आएंगे। आत्मा की तो कोई इच्छा-अपेक्षा होती ही नहीं है। पानी फ्रिज में रखे तो एकदम बर्फ थोड़ी ना होता है, लेकिन जैसे ही रखे, बनना चालू — भले आपको नहीं दिख रहा है। इसलिए हम ये नहीं कह सकते कि जीव पहले आया या इच्छा-अपेक्षा पहले आई। जन्म-मृत्यु आत्मा नहीं लेता, जन्म-मृत्यु में जीव जाता है — जब उसने कभी ना कभी कुछ स्वीकार किया, उस स्थिति में वह कुछ बन बैठा। जैसे आप विद्यार्थी कब बनते हो? जब आप पढ़ना स्वीकार करते हो; अगर पढ़ना स्वीकार ना करो तो मार-मार के कोई विद्यार्थी नहीं बना पाएगा। चोर वो तभी बनेगा जब चोरी करेगा खुद।
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वीडियो: अंतःकरण क्या है कहां स्थित है और क्या कार्य है ? #yogijikasatsang #live_satsang #Aadhyatmik · 2024-12-04