आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0043 · भाग 30

गुरु जी, आध्यात्म में कई लोग थोड़ा बहुत आगे पहुंचते हैं तो बखान करने लगते हैं — मैं दो घंटे ध्यान करता हूं, इतने उपवास करता हूं। क्या बखान करना चाहिए?

आध्यात्म में बखान तो होता ही नहीं। आध्यात्म में शुरुआत में ही बड़ाई खत्म हो जाती है; आध्यात्मिक व्यक्ति बड़ाई-निंदा में जाता ही नहीं। जो कहते हैं मैं दो घंटे ध्यान करता हूं, वह अभी शुरुआत है, वो आध्यात्मिक थोड़ी ना हो पाए हैं। जब तक आत्मज्ञान नहीं हो तब तक आप अपने आप को आध्यात्मिक नहीं कह सकते; वो प्राइमरी स्टेज है। विवाह में पति-पत्नी हैं तो उसका परिणाम उनके बच्चे दिखाएंगे। भक्ति कोई नहीं दिखाता, भक्ति का परिणाम दिखता है; साधना का परिणाम दिखता है। अगर कोई साधना दिखा रहा है तो वो पाखंड कर रहा है। साधना बताई और दिखाई नहीं जाती, गुप्त की जाती है, उसका परिणाम दिखता है।

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