आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0106 · भाग 30

अगर सामने वाला अपने भाव से मुझे जरूरत से ज्यादा दे रहा है, मैं डिमांड नहीं कर रही — तो क्या मुझे वहां रोकना सही है, या उसका भाव तोड़ने का मुझे दोष लगेगा?

रोकना नहीं है। उससे अपनी बात रख देनी है कि जितना आप दे रहे हो, मेरी जरूरत से ज्यादा है; अब जरूरत से ज्यादा अगर मैं लूंगा तो परेशान हो जाऊंगा — इसका मैं क्या करूं, आप बताओ। पहले उसका भाव मत तोड़िए — स्वीकार करिए, पहले ग्रहण कर लीजिए। मैं एक घटना बता रहा हूं: जिस आश्रम में हम मलाट में गए थे, वहां हमारे बड़े गुरु भाई थे। जा रहे थे तो उन्होंने मुझे पैसे दिए। मैंने उनसे पैसा लिया, और कुछ पैसे और मिला के मैंने कहा — यह मेरी तरफ से आपके लिए। बोले नहीं-नहीं। मैंने बोला — मैंने आपका भाव रखा, आप मेरा भाव रखिए; आपने दे दिया वो मेरा हो गया, अब मेरे पास जितना था मैं आपको दे रहा हूं, आप मेरे भाव का सम्मान करिए। फिर उन्होंने ले लिया। तो कहने का मतलब है — किसी के भाव को मत तोड़ो; अगर वो दे रहा है तो उस समय स्वीकार करो। स्वीकार करने के बाद उससे कह दीजिए कि मेरी जरूरत इतनी थी, इतना इसमें से बच गया, अब इसका क्या करना है, आप बताओ — क्योंकि इसका कैसे सदुपयोग होगा, मुझसे अच्छा आप जानते हो; देने वाले आप हो। लेकिन अगर वो पूछ रहा है "मैं कितना दूं?", तब अपनी लिमिट बताओ, अपनी जरूरत बताओ, उसमें संकोच मत करना। अगर उसने पूछा कितना दूं, इसका मतलब जितनी आपकी जरूरत है उससे कई गुना ज्यादा उसके पास है, तभी वो पूछ रहा है। तो कम बताने की गलती भी ना करना, नहीं तो और दरवाजों पे जाना पड़ेगा।

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वीडियो: खतरनाक ! मेरे ख्याल से #योगी · 2026-11-02