प्रश्नोत्तर P30-0150 · भाग 30
गुरु जी, हिंदू धर्म के अनुसार सृष्टि प्रारंभ हुई तो पहले मनु और शतरूपा आए; उनके जो बच्चे हुए, वे चार वर्णों में कैसे शामिल हो गए? क्या यह कर्मों का सिद्धांत हुआ, या बीच में कोई रूपरेखा बनी — जैसे कहते हैं मनुस्मृति में लिखा है कि मनुस्मृति ने चार वर्णों की व्यवस्था बनाई कि इस हिसाब से शासन चलेगा?
जो भी है — मनुस्मृति में क्या जरूरत पड़ी इस चीज को बनाने की, व्यवस्था लागू कर दी — जो बनाया है, बनाए। अपने को यह देखना है कि अपना आत्मिक कल्याण कैसे होगा। क्योंकि हम अगर उनसे मिले नहीं हैं, तो उनका पूरा मकसद जानने के लिए उनसे स्वयं मिलना पड़ेगा; जो इस सृष्टि की रचना किया है, उससे मिलना पड़ेगा — यह सब बातें पूरी तरह प्रत्यक्ष जानने के लिए। अब देखिए, हम उस तक कैसे पहुंचें। जितने भी महापुरुष हुए, आत्मा तक पहुंचे, ब्रह्म तक पहुंचे — उन्होंने क्या किया? निर्विकार हुए; छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड से मुक्त हुए; राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा से मुक्त हुए। और अपना उद्धार करने के बाद भी, अगर आदमी खाली अपने तक रहे — ज्ञान हो गया और समाज की तरफ ना जाए — तो भी पूर्ण रूप से मुक्त नहीं माना जाता। आप में मानवता है और आपके पास भोजन है, आप खा लिए, जो बचा है तुरंत लोगों के लिए ले जाओगे। जितने भी ज्ञान को उपलब्ध हुए, समाज में दर-दर जाके — लोगों ने उनका अपमान किया, जलील भी किया — फिर भी ज्ञान दिया। जब आप अपना आत्मिक कल्याण कर लोगे, उस स्थिति में पहुंचोगे, तब समझ में आएगा कि कल्याण क्या है। अभी तो उस स्थिति में हो कि समाज में कमियां देख रहे हो। जैसे मनु-शतरूपा के बारे में कोई आपको अपनी समझ से बताएगा — उससे बेनिफिट क्या है? कोई बेनिफिट नहीं है। हम ऐसे प्रश्न ढो रहे हैं जिनका हमारे जीवन में कोई मतलब नहीं है। अगर आपको सृष्टि के बारे में कुछ भी जानना है, तो यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे — जो ब्रह्मांड में है, वही पिंड में है; तो पिंड में उतर जाओ। और इसमें तभी उतरोगे, जब राग-द्वेष से मुक्त हो पाओगे, क्योंकि राग-द्वेष के बंधन ने आपको बहिर्मुखी किया है।
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वीडियो: महानता को समझे महानता क्या होती है ? #महानता · 2023-12-28