प्रश्नोत्तर P30-0153 · भाग 30
गुरु जी, शक्ति का स्वरूप क्या होता है? किस स्वरूप को माना जाए — रौद्र रूप माना जाए? किस रूप की पूजा करनी चाहिए?
देखिए, अपना आत्मिक कल्याण। आत्मिक कल्याण मतलब अपने को बुराइयों से कैसे मैं मुक्त हो जाऊं, अपनी आंतरिक ऊर्जा को कैसे जागृत करूं — इसलिए पूजा-पाठ वगैरह किया जाता है, मोक्ष के लिए। हम जहां राग-द्वेष में फंसे हैं, उस राग-द्वेष से मुक्त होने के लिए। आपको जो रूप पसंद आया, उसे अपना लो। चित्रकार ने जो भी बनाया, उसकी कल्पना रही, तो उसने हथियार दे दिए। मंदिर है, मंदिर में प्रतिमा है, उसे सामर्थ्यवान बताया गया है, उसके पास सब सामान है, लेके खड़ी है — और आप कुछ भी जाके बोलिए, वो किसी से बात नहीं करती; आप माथा पटको, जो भी करो, आप चले जाते हो। हमें वहां से यह सीखना है कि ऐसे ही समाज में कार्य करते हुए हमारे सामने चाहे अच्छे आएं, चाहे बुरे आएं — ना मुझे अच्छे में जाना है, ना बुरे में जाना है, सिर्फ मुझे काम करना है। जैसे मां गंगा, मां नर्मदा — इनमें चाहे अच्छा पानी आए, चाहे गटर का पानी, उनके जैसा बन जाता है। यह मंदिर जाके सीखना है — अपनी स्थिरता छोड़नी नहीं है; जैसे मूर्ति, कोई कुछ भी बोले। और अपने आप को सामर्थ्यवान बना के रखना है। धर्म कहता है कि ना तो मैं किसी पर प्रहार करूंगा, ना मुझ पर कोई करेगा तो मैं छोड़ूंगा — धर्म यह सिखाता है, अपनी आत्मरक्षा पहले। संविधान भी कहता है, अगर आत्मरक्षा में आपसे कुछ हो गया और सिद्ध हो गया, तो आपको छोड़ दिया जाता है। तो आत्मरक्षा आप अपनी कर सकें, उतनी ताकत रखिए। किसी को सताना पाप है, तो कोई अपने को सताए, उसको सहना भी पाप है। अपने को योग्य बना के रखो कि मैं अपनी आत्मरक्षा करते हुए समाज में काम करूं — ना अच्छे में जाना, ना बुरे में, क्योंकि एक में गए तो आप भटक गए। जो आए, मेरे कार्य में सहयोग करे; मैं वो कार्य लेकर चलूंगा जिससे मेरा भी कल्याण होगा, परिवार का भी होगा और समाज का भी होगा।
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वीडियो: महानता को समझे महानता क्या होती है ? #महानता · 2023-12-28