प्रश्नोत्तर P30-0154 · भाग 30
गुरु जी, चित्त की जो चंचलता होती है, उसके बारे में बताइए।
देखो, क्या होता है — चित्त मतलब लग जाना। जैसे मान लीजिए हम कहीं गए और किसी ने बहुत लोगों के बीच में मुझे धक्का मार दिया। अब होगा क्या — उसने मेरा अपमान कर दिया; अब जब तक मैं बदला नहीं ले लूंगा, उस आदमी पर चित्त लगा रहेगा। ऐसी जब घटनाएं होती हैं जो आप नहीं समझ पाते — दुख या सुख, राग-द्वेष में — तो उस पर चित्त लगा रहता है। तो राग-द्वेष में चित्त लगता है; अपने आप को राग-द्वेष से छुड़ाने का प्रयास करो। राग-द्वेष कब होता है? जब उम्मीद से ज्यादा, योग्यता से ज्यादा मिलता है, तो राग — उसके प्रति लगाव। और योग्यता से ज्यादा इच्छा थी, सामने वाले ने नहीं दिया, तो द्वेष। मांगा, नहीं दिया, तो द्वेष नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसने आश्वासन दिया ही नहीं। जब आपकी योग्यता से ज्यादा दे देगा और फिर नहीं देगा, तो द्वेष होगा; और देगा तो राग होगा — योग्यता से ज्यादा दिया है, तो उसका आप पर एहसान है। तो राग हो चाहे द्वेष, वो आपको भटकाता है। समझने के लिए अध्ययन करिए, अनुसरण करिए, और समझ के आगे बढ़िए, अपने आप को छुड़ाने का प्रयास करिए। और खुद समझिए — किसी पर निर्भर मत रहिए; बस इतना निर्भर रहिए कि कोई मार्ग बताए, बाकी सब आपका है। क्योंकि सब यही सीखते हैं या सिखाते हैं — अगर कोई सिखा रहा है, तो उसको भी किसी ने सिखाया है। और अपना आत्मकल्याण करने के बाद तब समझ में आएगा कि हम समाज में क्या कर सकते हैं।
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वीडियो: महानता को समझे महानता क्या होती है ? #महानता · 2023-12-28