आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0160 · भाग 30

गुरु जी, एक सेवक को कैसे रहना चाहिए?

सेवक का मतलब उसके ऊपर कोई मालिक है, तभी सेवक हुआ। अगर उस मालिक के शरण में उसने सेवा स्वीकार कर ली, तो मालिक का फैसला आखिरी फैसला — बस। अगर मालिक के बोलने पर सेवक का कोई प्रश्न खड़ा हो गया, तो फिर वो सेवक नहीं, वो नाम का सेवक है। उसके अंदर मालिकपन का भाव खुद छिपा हुआ है, तभी तो पूछा, कुछ जानना चाहा। जानना कौन चाहेगा? जिसे कुछ बनना होगा। जैसे ही उसने कुछ पूछा, मतलब मालिक पर संशय हो गया। मालिक ने कहा यह सामान ला, और उसने कहा नहीं, मैं यह सामान पकड़ा हूं — तब वो सेवक नहीं। वो सामान छोड़े, जाकर दे; वो टूट भी जाए तो कहे — क्या करें, आपका आदेश, और आखिरी आदेश। हां, उसे सुरक्षित रखे; ऐसा नहीं कि जान के तोड़ दे। समझदारी से — मालिक का नुकसान नहीं होना चाहिए।

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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24