प्रश्नोत्तर P30-0162 · भाग 30
गुरु जी, मेरे हिसाब से आप मेरे मालिक हैं, लेकिन आपने खुद घोषणा की है कि मैं मालिक नहीं, मैं सेवक हूं। तो फिर यहां कौन सेवक और कौन मालिक?
नहीं, यहां तो आप साधक हो, और आपको सेवकपन में आना है। हमारे जैसा ही कभी न कभी तुम्हें हो जाना है। कोई आपको मालिक समझे तो वो गलत समझ, भूल कर दिया उसने। मालिक तो इस सेवक के पीछे है। अगर कोई मालिक है, तो उसके अंदर दोनों गुण होंगे — मालिक के भी और सेवक के भी; तभी तो पहुंचा उस स्थिति पर। मालिकपन तब तक रहेगा जब तक तुम्हें कुछ चाहिए; जब तक कुछ चाहिए, तब तक मालिक।
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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24