आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0164 · भाग 30

गुरु जी, आपने कहा कि मालिक भी स्वयं और सेवक भी स्वयं — इसे थोड़ा और समझाइए।

आप उसी स्थिति में जाओगे तो समझ में आएगा। फिर भी — मान लीजिए आप ही हो। पत्नी के लिए पति हो, मां के लिए बेटे, और अपने बच्चे के लिए पिता। जब आप बच्चे को सहलाते हो तो देखो क्या भाव रहता है; मां को पकड़ते हो तो क्या भाव रहता है; पिता को, भाई को छूते हो, पत्नी को छूते हो, तो क्या भाव रहता है? इतना गुण तो तुम में अकेले में है। जब जरूरत होती है, वो भाव अपने आप प्रकट हो जाता है। जैसे ही बालक को गोद में लिए तो क्या भाव होगा, मां को गले लगाए तो क्या भाव होगा — हम तो दो ही बता रहे हैं, मालिक और सेवक; आपके पास तो इतने हैं।

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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24