प्रश्नोत्तर P31-0022 · भाग 31
लेकिन प्रभु, पता कैसे चले कि कौन अपना है और कौन पराया?
जहां आप खुल जाओ, जहां अपनी बात रख सको, और आपकी भावनाओं को सामने वाला समझ के आपको जवाब दे — वही अपना होता है। आप रिश्ते से मत जाइए, मैं पूरे ब्रह्मांड की बात कर रहा हूं। अगर कोई अपना है तो हमारी खुल के बात सुनेगा और मुझे सत मार्ग बताएगा; और अगर कोई पराया है तो मुझे दबाएगा कि आप बोलो मत। उसके अंदर आपके लिए अपनत्व का भाव ही नहीं, चाहे वो आपके घर का हो चाहे बाहर का। जो व्यक्ति हमारी बात नहीं सुन रहा, हमारी भावनाओं को नहीं समझ रहा, वह पराया है — वहां रुकने का कोई मतलब नहीं, उसके साथ रहना अपनी जिंदगी को बर्बाद करना है। आप वहां जाइए जहां आपकी भावनाओं की कद्र की जा रही है। अपना कभी पराया नहीं हो सकता और पराया कभी अपना नहीं हो सकता, इसलिए खुल के जियो। जहां बोलने के पहले मुझे सोचना पड़ रहा है, जहां दबाव-संकोच है, वहां अपने नहीं, पराए लोग रहते हैं — उस भीड़ से, उस झुंड से निकल जाना ठीक है, वो आपको घुटन में रखेगी, कमजोर बना देगी; वहां मोह और बंधन में मत आओ। जिंदगी तो बोझ तब लगती है जब जिसे हम अपना समझते हैं वह मुझे समझता नहीं।
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वीडियो: जीवन जीने की कला क्या है ? #योगीजी_का_सत्संग #aadhyatmik_satsang #live_satsang · 2024-12-03