प्रश्नोत्तर P31-0021 · भाग 31
कभी-कभी हम इन चीजों का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं तो सामने वाला उसे फॉर ग्रांटेड लेता है — कि इसे तो करना ही है, चाहे इसे तकलीफ होती रहे। जैसे सुबह से शाम तक किसी के लिए काम करके थक गए, पर सामने वाले को परवाह नहीं — तब क्या करें?
अगर आपको लग रहा है कि मेरा फर्ज है, तब तो करो; लेकिन लग रहा है कि फर्ज से बाहर हो रहा है तो त्याग कर दो — गुलामी में, दबाव में मत करो। क्या सच में आपने उस काम को जिम्मेदारी से लिया है? उस काम का कुछ चार्ज ले रही हो? तब तो आपको करना पड़ेगा। अगर आपने बांट दिया है कि यह मेरा काम है और वह आपका, तब तो सामने वाले से बड़ाई की उम्मीद ही मत रखो; नहीं तो आपसे जितना हो सकता है उतना करिए, इससे ज्यादा चाहिए तो वो खुद कर लें। हमारे करने से किसी को तकलीफ ना हो, यह ध्यान मुझे रखना है; लेकिन किसी के करने से मुझे भी तकलीफ हो रही है तो उस जगह, उस व्यक्ति का त्याग कर दो। बुद्धिमानी यह नहीं कि आप तकलीफ झेलती रहो — तब तो आप अपना शोषण करवा रही हो। शोषण करना अगर पाप है तो करवाना भी तो पाप है। जीवन को इस तरीके से जियो — ना तो गुलाम बनना है, ना किसी को गुलाम बनाना; ना दबाव में जीना है, ना किसी को दबाव में जिलाना; ना प्रभाव देना है, ना लेना है; ना शोषण करना है, ना करवाना है।
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वीडियो: जीवन जीने की कला क्या है ? #योगीजी_का_सत्संग #aadhyatmik_satsang #live_satsang · 2024-12-03