आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P31-0137 · भाग 31

गुरु जी, हम तो आधी उम्र पार कर गए, पचास के पार हो गए। जो कुछ पल हमारे लिए बचे हैं, उनमें हम अपनी मुक्ति का मार्ग कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

जितना प्राप्त किया है उसको छोड़ दो और सात्विक तरीके से जीवन जीना चालू करो। लालच में सेवा मत करो, लालच से मुक्त होकर सेवा करो। लालची आदमी भूखे जानवर जैसा है, कहीं भी मुंह मार देता है। इसलिए अपने लालच को हटा दो और सात्विक तरीके से बिना इच्छा-अपेक्षा के सेवा में लग जाओ। ना बड़ाई की, ना मान की कोई इच्छा — बस एक ही इच्छा कि मैं कैसे निर्विकार हो जाऊं, कैसे अपनी बुराइयों से मुक्त हो जाऊं, कैसे इस अशांत भरे जीवन से मुक्ति पा जाऊं। तन से, धन से, ज्ञान से जो आपके पास है, वह लेकर वहां खड़े हो जाओ जहां जरूरतमंद है। जिसके आगे-पीछे हजारों लोग थाली मांजने गए, उनकी थाली धोकर कुछ नहीं मिलेगा, अहम भाव बढ़ेगा। भोजन उसको कराओ जो एक-दो दिन का भूखा है। जहां छप्पन प्रकार का भोजन है वहां दान करके क्या मिलेगा — अहम भाव मिलेगा, एक नाम लिखा जाएगा। जरूरतमंद को दो, जहां सदुपयोग हो। बीज को पृथ्वी में लगाओगे तो कई गुना फल देगा, लेकिन तिजोरी में पटक दोगे तो क्या होगा? ज्यादातर लोग यही कर रहे हैं — दान वहां दे रहे हैं जहां जरूरत ही नहीं है, बस अपने मान को खड़ा करने के लिए।

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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12