प्रश्नोत्तर P31-0138 · भाग 31
गुरुदेव, बंधन क्या है? परिवार में रहते हुए इससे कैसे मुक्त हों?
बंधन है "अपने तरीके से चाहिए"। हमें किसी से व्यक्तिगत लगाव नहीं है, हमारी जरूरत से लगाव है। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — पांच इंद्रियों द्वारा हमें सुख मिलता है। प्रथम सुख पहली बार मां से मिलता है — वह मुझे सबसे सुंदर लगती है, उसकी आवाज अच्छी लगती है, सुगंध अच्छी लगती है, दूध का स्वाद अच्छा लगता है, उसे छूना अच्छा लगता है। इसके बाद स्त्री है तो पुरुष से, पुरुष है तो स्त्री से पांचों सुख मिलता है। भोजन से चार मिलते हैं। तो भोग और भोजन में हमारा ज्यादा बंधन है। ऐसा नहीं कि उससे लगाव है — उससे कुछ मिल रहा है, रस मिल रहा है, उससे लगाव है। उस मोह में हम बुरी तरह फंस गए हैं। कभी-कभी ऐसा होता है कि मिलना बंद हो जाता है तो हम उसे देखना भी पसंद नहीं करते। तो बंधन है — मुझे मिलता रहे। मिलता रहा तो राग, नहीं मिला तो द्वेष, इसी में हम उलझे हुए हैं। "अपने तरीके से चाहिए" का त्याग करो, तो सारे बंधनों से आप अपने आप को छुड़ा पाओगे।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12