प्रश्नोत्तर P31-0152 · भाग 31
गुरु जी, जब परमात्मा से सब कुछ पैदा हुआ है, तो क्या सब कुछ परमात्मा ही है? क्या परमात्मा खुद ही जन्म-मरण में पड़े हुए हैं? क्या इंसान, संसार सब भगवान ही है, वही कण-कण में है?
देखिए, इस बल्ब से उजाला है, लेकिन उजाला बल्ब थोड़ी ना है। हां, इस उजाले के माध्यम से बल्ब तक पहुंच सकते हैं, लेकिन उजाले में बल्ब नहीं है; उजाले में कुछ भी करो, बल्ब पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। तो परमात्मा से सब है, सब में परमात्मा नहीं है। अगर परमात्मा सब में होता तो फिर ढूंढने की जरूरत क्यों होती? जैसे बल्ब के उजाले को माध्यम बनाकर बल्ब तक पहुंचा जा सकता है, वैसे ही इस जगत को माध्यम बनाकर उस ब्रह्म तक, परमात्मा तक पहुंचा जा सकता है। सात्विक तरीके से जिएंगे तो पहुंच जाएंगे; तामसी-राजसी तरीके से जिएंगे तो बस इसी संसार में भटकते रहोगे।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12