प्रश्नोत्तर P31-0158 · भाग 31
गुरु जी, मेरे मन में दूसरों के प्रति ईर्ष्या आ जाती है। क्या करूं कि ईर्ष्या ना हो और हमेशा दूसरों के प्रति उन्नति और कल्याण की भावना बनी रहे?
आपको कोई उम्मीद है बड़ा बनने की, आप अपने आप को उनसे कुछ अलग समझते हैं, इसलिए ऐसा आता है। तो उस अलगाव को खत्म करिए — सब एक जैसे हैं। बैकग्राउंड को छोड़ दीजिए, आवरण से हट जाइए। जैसे पंखे में भी वही विद्युत है और बल्ब में भी वही विद्युत है — एक उजाला दे रहा है, एक नाच रहा है, लेकिन विद्युत वही है, ऊर्जा वही है। बाहर का आवरण हटा दो, तो सब एक जैसे हैं।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12