प्रश्नोत्तर P31-0159 · भाग 31
गुरु जी, सत्संग में सुना है कि मैं शरीर ना, मैं आत्मा हूं। तो आत्मा क्या है? आत्मा का क्या अर्थ है?
आत्मा "क्या है" से परे है। आत्मा, मैं, परम सत्य — कुछ भी बोल दो, बस संबोधन के लिए है। मेरा-मैं में बात करनी है तो समझने के लिए उसे मैं बोला जाता है, आत्मा बोला जाता है; लेकिन स्वयं के लिए कुछ नहीं बोलना है। जैसे आप लोगों के नाम हैं — क्या आपने कभी अपने आप को बताया कि मैं राजेश हूं? नहीं। यह शरीर का नाम दूसरों के लिए है, ताकि वे आसानी से आपको खोज लें, हम एक-दूसरे तक पहुंच जाएं। अपने लिए किसी का नाम है क्या? तो यह समझने के लिए आत्मा, सोल, आप, तुम, मैं का प्रयोग किया जाता है; बाकी तो कुछ भी नहीं है। अपने को अपना नाम देने की जरूरत नहीं।
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वीडियो: भगवान के दर्शन कैसे करें / #योगीजी_का_सत्संग #भगवान #दर्शन #satsang · 2024-07-12