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प्रश्नोत्तर P4-0012 · भाग 4

(लाइव) योगी जी, आपने कहा कि मन में गलत सोच रहे हो तो कोई बात नहीं, बस कर्म में मत लाना। जब से यह अपनाया है, पहले से ज्यादा घृणित और कामी (विचारों वाला) हो गया हूं; मुझे ऐसे विचार आते हैं कि बोल नहीं पा रहा हूं।

आने दो ना। आप बस सात्विक कर्म करो, बस आने दो। और आप शरीर से ऐसा काम मत करो। देखो, जैसे मान लीजिए मैला पानी है; अब आप उसमें कुछ नहीं मिला रहे हो, आप उसे ऐसे ही छोड़ दो — तो आप देखोगे कि वो धीरे-धीरे और भी सड़ने लगेगा, और एक दिन ऐसा हो जाएगा कि (वह गंदगी) खत्म हो जाएगी। तो इस व्यक्ति को जैसे ही विचार और गंदे आ रहे हैं, इसका मतलब वो सफाई हो रही है। बस शरीर से मत करना, ऐसी गलती मत करना। और (अगर) पता चला कि वो आधे से ज्यादा सड़ गया, और बहुत ज्यादा बास मार रहा है, तो अब कुछ मिला दूं — तो (बदबू) कम तो हो जाएगी, लेकिन वो (गंदगी फिर) जिंदा हो जाएगी। (जैसे) गोबर को डालते हैं, तो वो सड़-सड़ के खाद हो जाता है, फिर वो बदबू भी नहीं मारता; नया-नया गोबर जब सड़ता है, तब बास मारता है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01