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प्रश्नोत्तर P5-0002 · भाग 5

(वही साधिका) आप जब खोज करते थे, तो आत्म-चिंतन से करते थे या किताबों से? और गिरना-उठना मन की स्थिति से पता चलता है?

साहब, अपने आप सब — जैसे भी हो जाए भाई। पत्ता उठाने से हो जाए, तो पत्ता उठा लूंगा; हमें क्या पता कैसे हो जाएगा। मैं जाता था, (तो) कोई बोलता था — जाओ, वहां माथा टेको, तो मैं वहां चला जाता था; मुझे थोड़ी नहीं पता था कैसे हो जाएगा। जितनी मेरी सामर्थ्य थी, जितना लोगों ने बताया, जितना मैंने उचित समझा, वो कर डाला। (उचित समझना —) ऐसा नहीं कि मुझे लगा कि ये करने से मैं उठूंगा, तभी (करूंगा); (बल्कि) मुझे लगेगा कि ये करने से गिरूंगा, तो मैं नहीं करूंगा। मुझे हर पल अपनी स्थिति देखनी है — गिर रहा हूं, उठ रहा हूं। इसका विशेष ध्यान रखना है कि ये करने से क्या होगा — उठूं या ना उठूं, लेकिन गिरूंगा तो नहीं ना — तब करूंगा। (गिरना-उठना मन की स्थिति से पता चलता है?) आपके कर्म से पता चल जाता है। (भीतर से ग्लानि लगने लगती है, मन बेचैन होने लगता है —) कुछ तो होता है ना, पता चल जाता है। तो जब भीतर समझ में आने लगे, तो (वो) काम ही मत करो ना। (पर आदत हो जाती है —) तो भोग लो, कोई बात नहीं — आदत है तो भोगो; आदत है, (तो) बनाए रखना, छोड़ना नहीं — (पर) नुकसान आएगा तो बहुत भारी। (जब तकलीफ देगी तो अपने आप छूट जाएगी?) हो सकता है तकलीफ में भी जीने की आदत हो जाए। एक नशेड़ी नशा करता है, इंजेक्शन मारता है, मरने दम तक कहता है कि अब इसे नहीं छोड़ पाऊंगा, मर जाऊंगा — और मर जाता है। तो अगर ऐसी आदत है, तो कोई बात नहीं — मरोगे तुम। झेलने की ताकत तुम्हें जितनी है, उतना कर जाओ, जो भी करना। अरे भाई, शेर सामने आ जाएगा, तो तुम क्या कर लोगे? अब कहोगे — भाई, झेलने की ताकत है या नहीं? अब तुम खत्म। तो एक समय ऐसा आता है, आदत आपको मार देगी। जंगल में जाने से पहले ही सचेत हो जाते; लेकिन जब शेर सामने आ गया, तो अब जो करना है, शेर करेगा। आदतें हमें मार देती हैं। मरने के पहले आदतें छोड़ दो — बुरी आदत — या तो फिर मर जाओ। क्या फर्क पड़ेगा? दुनिया का क्या होगा? मर जाओगे — तुम्हारे पहले भी (दुनिया) चल रही थी, तुम्हारे बाद भी चल रही है। वो बोला ना कि (पत्नी) गई, (तो) दूसरी शादी — तो तुम्हें लगता है कि मैं हूं (तो दुनिया है)? अरे, तुम्हारे जैसे कितने आए और गए। (सोचोगे कि) मैं ज्ञान दूंगा तो लोगों को (मिलेगा) — अरे, तुम्हारे जैसे कितने आए-गए; आपको मौका मिला है; तुम्हारे पहले भी ज्ञान देके गए, बाद में भी देंगे। तो तुम ईमानदारी से, जिस काम को लिए हो, करो — नहीं करोगे तो भी होगा, कर दोगे तो भी होगा; आप ये मत समझना (कि तुम्हारे बिना नहीं होगा)।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17