प्रश्नोत्तर P5-0041 · भाग 5
कर्म सेटलमेंट नहीं भी हुआ तो क्या आत्मज्ञान हो सकता है? पेंडिंग कर्म बाद में?
अभी हो जाएगा। आत्मज्ञान कभी भी हो सकता है। जैसे रामकृष्ण परमहंस को आत्मज्ञान के बाद कैंसर का भोग भोगना पड़ा, महर्षि रमण को भी। वही तो मैं कहना चाहता हूँ। आप कभी भी करवा सकते हो। इसीलिए तो इसके लिए प्रयास किया जाता है। जो पेंडिंग कर्म हैं, उनका ध्यान ना दो। अभी से ईमानदारी और सत्कर्म पूरी तरह लागू करो। और वो बिना कार्मिक सेटलमेंट के हो जाए, तो बाद में भोग लिया जाएगा। बाद में भोगना ही पड़ेगा। भोगना तो पड़ेगा।
वो देता है, और कहीं न कहीं उसके पीछे चुनाव आपका भी रहता है। जैसे आज प्रत्यक्ष ज्ञान। मैंने यही भाव बनाया था। देखा कि आध्यात्म बेचा-खरीदा खूब जा रहा है। मैंने कहा, अभी मैं बोलूँ ये गलत है, तो सही क्या है, बताओ। कम से कम गलत के सहारे तो खड़ा है। तो मैंने कहा, मैं प्रत्यक्ष ज्ञान ढूँढूँगा। और आज लोग आध्यात्म को बड़ा बना के रखे हैं, लोग मिलते नहीं हैं। मैं गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले, बस में, ट्रेन में, दुकान पर, रोड पर, गटर के बगल में सत्संग करूँगा। यहाँ तक कि मैं शौचालय के सामने भी सत्संग किया हूँ, ऐसे फटे कपड़ों में। बस स्टैंड पर शौचालय था। जब एक आदमी आकर पूछता है, ध्यान से देखेंगे तो उसमें एक आदमी पूछ भी रहा है। मैंने कहा, मैं घूम-घूम के दूँगा। ले भैया, ये अध्यात्म है। और मैं पूरा इसको खोल दूँगा। जितना रहस्यमय बनाए हैं, मैं खोल दूँगा।
खोज में मुझे इनके ऊपर बहुत गुस्सा आता था। अभी गुस्सा होता है क्या। अब नहीं। खोज में बहुत गुस्सा आता था। अरे वीआईपी। जिज्ञासु कभी वीवीआईपी होता है क्या। शाम को आया करो, महाराज साधना में हैं। सामान्य आदमी को हॉल में भेज दिया। कितनी जिज्ञासा लेकर आया था। और एक कार वाला आदमी आया, दो बजे रात को गेट खोल दे रहे हो। इसलिए मुझे बहुत गुस्सा था। कथा में भी देखो। जो जिज्ञासु है, प्यासा है सुनने के लिए, उसे कोई सुविधा नहीं दी जाती। जिसको रुचि नहीं, उसे कार्ड देकर बुलाते हैं। मैंने कहा, सब खत्म कर दूँगा।
जब मैं कुटिया बनने से पहले घूमता था, तो गाँव के करोड़पति भी रोड पर खड़े होकर सुनते थे। सुनना पड़ता था। जेब में हाथ डाले। और वही झोपड़ी वाला भी था, और सुनते थे। गाड़ी रुक जाती थी। लोग खड़े होकर देखने लगते थे, क्योंकि तेज से बोलता था, आवाज बड़ी है। दूर से सुनते थे। शर्म के मारे पास नहीं आते थे, क्योंकि झोपड़ी वाला था, लेकिन सुनते थे। घर में भी बुलाते थे, सुनते थे। तो मैंने कहा, मैं अध्यात्म के पूरे रहस्य को खोल दूँगा। और हर व्यक्ति आत्मज्ञान को उपलब्ध हो सकता है, जहाँ तक मैं समझता हूँ। अगर वो व्यक्ति मन और बुद्धि से पागल या अबोध नहीं है, और आध्यात्म समझ में आ रहा है, तो आप उस परम स्थिति तक पहुँच सकते हो। ये आपके ऊपर है। पूरा खोल के रख दो। चाहे जिस मार्ग का मुझसे प्रश्न करो, मैं पूरा खोल देता हूँ।
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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18