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प्रश्नोत्तर P5-0059 · भाग 5

परिवार में रहकर पहले ईमानदार कैसे बनूं? ईमानदारी का परिणाम नुकसान भी हो सकता है तो क्या करें?

हो जाओ। ईमानदार बनो। कुछ भी हो जाए, ईमानदार हो ही जाओ। उसका परिणाम कुछ भी आए, क्या फर्क पड़ता है। जहां भी रहोगे, तुम तो रहोगे। कम से कम ईमानदार बन के तो रहोगे। और आखिरी में तो आप जिसको बचाना चाहते हो, वह छूट ही जाएगा। तो बेईमान बनके क्यों छूटो। साथ छूट रहा है। अगर साथ ही छूटना है तो ईमानदार बनके छूटो। क्या आप उसे बचा लोगे। क्या बेईमानी करके उन रिश्तों को बचा लोगे। जिंदा या मुर्दा, छोड़ना तो पड़ेगा। ऐसा तो नहीं कि वह रिश्ता था, है और रहेगा। रिश्ता बना है, मिट जाएगा। उसे बचा तो नहीं सकते। कम से कम जा ही रहे हो तो बेईमान बन के तो मत जाओ। इसलिए ईमानदार हो जाओ, पूरी तरह। परिणाम कुछ भी आए, क्या फर्क पड़ता है। जहां भी पाओगे, अपने आप को तो पाओगे। अपने साथ कम से कम ईमानदार तो हो जाओगे। ईमानदार का तो साथ कर लोगे। अभी तो एक बेईमान के साथ हो। घुटन है, वह तुम ही हो। कुछ भी हो जाए, क्या फर्क पड़ता है। जहां भी रहूंगा, मैं तो रहूंगा। ईमानदार के साथ तो जिंदगी रहेगी, चाहे जितना भी हो जाए। उसका नहीं देखना। जिसको बचाना चाहते हो, क्या वह नहीं छूटेगा। छूटेगा। क्या आपको लगता है कि बेईमानी से आप उसे बचा लोगे। बचा तो नहीं पाएंगे। इसलिए ईमानदार हो ही जाओ। अभी भी मौका है। ऐसा न हो, मौका चला जाए। फिर ईमानदारी का भी कोई मतलब नहीं है। ईमानदारी का मतलब तब तक है जब तक आपके हाथ में कर्म है। क्योंकि ऐसी अवस्था आएगी, आपसे कर्म छीन लिया जाएगा। फिर क्या करोगे। एक बेईमान के साथ घुटन होगी बुढ़ापे में। कम से कम जीना है तो ईमानदार के साथ जियो। ईमानदारी पकड़ो, और किसी भी स्थिति में वह छूटे नहीं। सब छूट जाए, चलेगा। इसलिए कि ईमानदारी ही आपको उस परम सत्ता से मिला सकती है, और कोई नहीं। छोटी छोटी बातों में भी नहीं होना चाहिए। कहीं जा रहे हो, उचित जगह नहीं है। बाथरूम आ गया, आदमी देखता है। थूक आ गया मुंह के अंदर, देखता है इधर उधर कोई देख नहीं रहा, लेकिन उचित जगह नहीं है थूकने के लिए, थूक दिया। नहीं थूकना चाहिए। मैं तो देख रहा हूं। अगर मैं नहीं देख पाऊं, तो दोष नहीं है। जैसे एक बालक नहीं देख पाता कि कहां मल मूत्र करता है। मैं अपने आप तो देख ही रहा हूं। तुम तो देख रहे हो, और तुम्हें यह भी पता है कि यहां थूकना और बाथरूम करना मना है। मन में भी आता है कि यहां सही नहीं है। तो नहीं करना चाहिए। अभी भी ईमानदारी पकड़ लो। और कैसे भी, किसी भी तरीके से अपना कल्याण कर लो। ऐसा न हो, प्लानिंग में जिंदगी चली जाए। सब हाथ से चला जाए। पता चला, समझ है तो समय नहीं, समय है तो समझ नहीं। बहुत सौभाग्यशाली हैं जो समय पर समझ का उपयोग करके निकल जाते हैं। एक दिन ऐसा होगा, करने लायक ही नहीं रहोगे। अभी मौका है, समझ भी है, समय भी है, शरीर भी है। हाथ से गया तो गया सब। फिर कुछ नहीं कर पाओगे।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09