प्रश्नोत्तर P5-0063 · भाग 5
ओवरथिंकिंग अध्यात्म में भी होती है। कैसे रोकें?
हमारी आदतें जहां भी रखोगे, वहीं रहेंगी। जगह बदलने से आदतें नहीं बदलतीं। इस फूल को उठाओ, यहां से वहां रख दो, तो भी वही फूल रहेगा। जगह बदल जाएगी, आदतें तो हमारी वही रहेंगी। ओवरथिंकिंग किसी का सही नहीं है। अध्यात्म में भी ओवरथिंकिंग सही नहीं है।
अपने जीवन में दो प्रश्न करो। मैं यह करने जा रहा हूं, क्या मैं इस लायक हूं। जवाब मिले हां या ना। अगर हां मिले, तब तो बढ़ जाओ। दूसरे प्रश्न की जरूरत नहीं है। अगर उत्तर यह आए कि मैं इस लायक नहीं हूं, तो एक प्रश्न और अपने आप से करो, कि मैं मेहनत करके इस लायक बन सकता हूं। अगर उत्तर ना मिले, तो बात खत्म। अब आप नहीं कर पाओगे। और अगर उत्तर मिले कि हां, मैं कर सकता हूं, मेरी काबिलियत है, बस मुझे जरूरत है कि ऐसा कोई व्यक्ति मिल जाए जो मुझे सपोर्ट कर दे, तब आप आगे बढ़ जाओ। तब आपकी ओवरथिंकिंग काम नहीं करेगी।
दो सवाल हर व्यक्ति को, हर युवा को, जहां भी जा रहे हो, कुछ लेना है या करना है, दो सवाल करो। ये दो सवाल आपको सही जगह पहुंचा देंगे, जिस लायक आप हो। पहला सवाल, मैं कुछ करने जा रहा हूं, क्या मैं इस लायक हूं। हां, तो कर दो। नहीं लायक हूं, तो दूसरा सवाल, क्या मैं उस लायक बन सकता हूं। हां, बन सकता हूं, तो कर दूं। अब दोनों में अगर ना मिले तो बात खत्म। तब कुछ नहीं होगा। प्राकृतिक हो जाए, जिसे चमत्कार कहते हैं, वह हो जाए तो बात अलग है। लेकिन आपसे अब नहीं होगा। आपका प्रयास करने का भी कोई मतलब नहीं होगा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09