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प्रश्नोत्तर P5-0188 · भाग 5

यहां आकर तीसरे/भीड़ के चक्कर में क्यों न पड़ें?

आप इस पर चिंतन करिए। मैं इसलिए कह रहा हूं कि आप लोग किसी के चक्कर में मत पड़ो। आप लोग सिर्फ एक व्यक्ति के लिए यहां आए हो। मेरे अलावा तुम्हारी जिंदगी में दूसरा होना ही नहीं चाहिए। और मेरे लिए, तुम्हारे जीवन में तीसरा आना ही नहीं चाहिए। अगर तीसरे की एंट्री हुई, तो इसका मतलब तुम गए। जिस उद्देश्य को लेकर आए हो, अब उसकी पूर्ति नहीं होगी। क्योंकि तुमने तीसरे को पकड़ लिया। लक्ष्य से विचलित हो गए। अर्जुन के साथ क्या हुआ था? पांचों पांडवों के साथ। सबने बोला, मुझे पेड़ दिख रहा है, ये दिख रहा है, वो दिख रहा है, चिड़िया दिख रही है। अर्जुन ने कहा, मुझे आंख दिख रही है। क्योंकि कहा गया था, निशाना आंख पर लगाना है। अब तुझे दिख क्या रहा है? सबने अलग-अलग कहा। अर्जुन ने कहा, मुझे आंख दिख रही है। बोले, मार दे। तो मैं जिस उपदेश से गया हूं, और मुझसे अगर कोई सवाल कर रहा है, और मैं यहां किसी से सवाल कर रहा हूं, तो मुझे जवाब ही चाहिए। उसके अलावा कोई बात ही नहीं करनी। उसके अलावा बात की, इसका मतलब तुम उसमें गए थे। हमें भीड़ नहीं देखनी। मुझे मेरा मकसद देखना है। जिस उद्देश्य को लेकर मैं इस व्यक्ति के पास आया हूं, क्या मेरे उद्देश्य की पूर्ति हो रही है? हो रही है तो ठीक है। नहीं हो रही, तो छोड़ दो। चाहे उसके पास लाखों लोग हों। मुझसे क्या मतलब? मैं कहीं गया हूं तो उपदेश लेकर गया हूं। जीवन में ये बात याद रखो। किसी और को मत देखो। मैं जिसके पास गया हूं, क्या उस उपदेश की पूर्ति हो रही है, हां या ना? अगर हां, तो मैं उस उपदेश की पूर्ति करूंगा। वहां तब तक रुकूंगा, जब तक मेरी पूर्ति नहीं हो जाती। और नहीं हो रही, तो मैं चला जाऊंगा। मुझे उस व्यक्ति से और मुझसे मतलब है। मुझे तीसरे से मतलब नहीं, कि किसके उपदेश की पूर्ति हो रही है और किसके नहीं। अगर किसी के उपदेश की पूर्ति हो रही है और मेरी नहीं, तो उसके उपदेश की पूर्ति से मेरा क्या होने वाला है? मेरा थोड़ी कुछ होगा। वो दुनिया के लिए भगवान हो, मुझसे क्या मतलब? क्योंकि मैं भगवान थोड़ी खोज रहा हूं। मैं परमात्मा थोड़ी खोज रहा हूं। मेरी, मेरे उपदेश की पूर्ति हो जाए। मैं उस व्यक्ति को खोज रहा हूं। मुझे भगवान थोड़ी चाहिए। मुझे परमात्मा थोड़ी चाहिए। परमात्मा लेकर क्या करूंगा? चलो, परमात्मा भी मिल गया। लेकिन अगर मेरे उपदेश की पूर्ति नहीं हो रही, तो ऐसे परमात्मा को लेकर क्या करूंगा? क्योंकि जीवन में मैं किसी से मिल रहा हूं, तो किसी उद्देश्य को लेकर मिल रहा हूं। उद्देश्य पूरा होना चाहिए। और वो पूरा नहीं हो रहा, सामने वाला परमात्मा भी हो, तो मुझसे क्या मतलब। मेरे उद्देश्य की पूर्ति कर दे, ऐसा व्यक्ति मेरे जीवन में चाहिए। मिल गया, तो मैं करता रहूंगा। नहीं मिला, तो मैं खोजूंगा। मुझे और किसी से मतलब नहीं। और जहां मेरे उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो रही, उसको पूरा संसार, पूरा विश्व परमात्मा मान ले, मुझे क्या मिलेगा? क्योंकि मेरे लिए मैं क्या हूं, वो मायने रखता है। आप क्या हो, वो थोड़ी मायने रखता है। मेरी जिंदगी मुझसे है, तुझसे थोड़ी। मैं अपने स्तर को उठाने तेरे पास आया हूं। मैं अपनी समझ को विकसित करने तेरे पास आया हूं। मैं तेरे लिए तेरे पास थोड़ी आया हूं। मैं अपने लिए तेरे पास आया हूं। तो मुझे सीधी बात करनी चाहिए। जिस के लिए गया हूं, वो हो रहा है? हो रहा है, तो मैं उस व्यक्ति के पास रुकूंगा। नहीं हो रहा, तो मैं आगे बढ़ूंगा। जब ये भाव रहेगा, तब जाके आपका आत्मिक कल्याण होगा। तब आपके उद्देश्य की पूर्ति होगी। दुनिया की हर ताकत आपकी मदद करेगी। तुम नहीं फंसे हो, दूसरों को फंसा दोगे। आप जैसे लोगों से प्रेरणा लेते हैं लोग। जैसे कोई बुजुर्ग है, कोई पढ़ा-लिखा है, कोई काम कर रहा है, तो बच्चे उससे प्रेरणा लेते हैं। मेरा कुछ नहीं होने वाला। लेकिन जितने लोग मुझसे प्रेरणा लेंगे, उनका कुछ होगा। आज हम जितना सीखते हैं, समाज को देख के ही सीखते हैं। बाद में छांटते हैं। लेकिन समाज को देख के ही सीखते हैं। मेरा तो कुछ नहीं होगा। लेकिन जितने लोग मुझसे प्रेरणा लें, उनका तो कुछ होगा। तो मुझे उस तरीके से बोलना चाहिए, उस तरीके से जीना चाहिए, कि मुझसे कोई सीख के आगे बढ़े। मैं नहीं फंसा हूं। लेकिन मेरे शब्द किसी और को तो नहीं फंसा रहे। मैं विचलित नहीं हो रहा। लेकिन मेरा चाल-चलन ऐसा नहीं होना चाहिए कि दूसरा विचलित हो रहा हो। उसका जिम्मेदार तो मैं हुआ। तो शब्दों का प्रयोग, उठना, बैठना, चलना, सोच-समझ के करना होगा। क्योंकि एक सीखने वाला है, एक सिखाने वाला है। हम लोग सबसे ज्यादा कहां से सीखते हैं? देखकर और सुनकर। और वो ज्यादा सीखते हैं। बच्चों को कोई गाली सिखाता है? आपने अपने बच्चों को कभी पकड़ के गाली सिखाई? लेकिन बच्चों को गाली आती है। कहां से आती है? समाज से। समाज मतलब तुम ही से। उसमें तुम भी एक हो। देख के, सुन के आती है। तो चलो, मैं विचलित नहीं हो रहा, लेकिन कुछ ऐसे वाक्य तो नहीं बोल रहा कि लोग विचलित हो जाएं, लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे। शब्दों को बहुत समझ के बोलना चाहिए। पूर्वजों ने कहा था, सुनो, समझ लो पहले, और फिर धुनो। इसका परिणाम क्या है? आप सीधे-साफ व्यक्ति हो। अपने कल्याण में लगे रहो। आपका कल्याण हो जाए। मेरा भाव यही है कि आप लोगों का कल्याण हो। आपका भाव पूरा होगा। इसमें किसी किस्म का संदेह नहीं। बोलने का मतलब यही है। काम करने का मतलब सिर्फ इतना ही है। एक चीज नोट कर लो। आखिरी तक आप जहां लगे हो, वही चले जाओ। आखिरी तक आप किस भाव से लगे हो, वही यात्रा आगे होगी। वही मेरी यात्रा पूरी होगी। आप लगे हो, तो यात्रा पूरी होगी ही होगी। कोई डाउट नहीं। मेरे को भी नहीं है। किसी और को भी नहीं रहना चाहिए। मुझे डाउट नहीं होना चाहिए। बस, मुझे और मेरे गुरु। दो को डाउट नहीं होना चाहिए। आप तो शुरू से ही मेरे उसमें हो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23