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प्रश्नोत्तर P5-0191 · भाग 5

ईश्वर कहीं है क्या?

इससे क्या फर्क पड़ता है? वो है या नहीं है? मेरी जिंदगी तो है। मैं तो हूं। लोग हैं मेरे आसपास। बेईमानी भी है, ईमानदारी भी है, सत्कर्म भी है। सब समझ में आ रहा है। तो मुझे क्या मतलब ईश्वर से? खेल यहां ईश्वर का नहीं है। ना तो ईश्वर मुझे चाहिए। खेल है, मैं क्या कर रहा हूं। क्या खेल रहा हूं। किस खेल का मैं मास्टर हूं, और मैं उसमें क्या कर रहा हूं, ये देखना है। मास्टर ब्लास्टर है, किसी न किसी चीज में। यहां हर व्यक्ति मास्टर है। राजा अगर मास्टर है, तो सैनिक भी मास्टर है। वो अलग जगह मास्टर है, ये अलग जगह मास्टर है। मास्टर यहां सब हैं। राजा कहीं और मास्टर है, तो सैनिक पब्लिक को ही धौंस दे रहा है। एक हवलदार है। हवलदार के ऊपर कोई है, सेठ है, तो उसको सलामी मार रहा है। लेकिन कोई अगर उससे नीचे है, तो उसको डंडा दिखा रहा है। आप ये मत सोचना कि वो आखिरी पोस्ट पर है, हवलदार है, इसलिए कुछ नहीं। उसकी भी एक पोस्ट है। मास्टर तो वही है, अपने खेल में। अब पता चला, उसे डंडा तो मिला है। अब उस डंडे का उपयोग कहां कर रहा है? लोगों को दबाने में, कि लोगों को बचाने में। मास्टर वो भी है। यहां सब मास्टर हैं। यहां हर व्यक्ति मास्टर है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23