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प्रश्नोत्तर P5-0192 · भाग 5

पत्नी मेरे ऊपर निर्भर है — आध्यात्म में कैसे आगे बढ़ूं?

पत्नी निर्भर नहीं है। निर्भर आपने किया है। तो उसकी जरूरत पूरी करो, और आगे जाओ। जीव का स्वभाव है मालिकपन बनना, क्योंकि वो मालिक के साथ था। वो सब पर अधिकार जमाना चाहता है। अगर वो किसी के अधीन है, तो मजबूरी में है। जीव कभी भी अधीनता स्वीकार नहीं करना चाहता। शेर अगर आदमी के कंट्रोल में हो गया, तो कोई कारण बना है। वो अधीन नहीं रहना चाहता। लेकिन अधीनता स्वीकार की है, तो उसके पीछे कोई कारण है। यहां जीव का स्वभाव है, चाहे राजा हो, चाहे रंक हो, कंट्रोल करना चाहता है। और किसी के अधीन रहना नहीं चाहता। अधीन रहना मजबूरी है, परिस्थिति है। विद्यार्थी शिक्षक से शिक्षा इसलिए ले रहा है कि मैं तुमसे आगे निकल जाऊं। शिक्षा इसलिए नहीं ले रहा कि मैं तुमसे नीचे रहूं। शिक्षा इसलिए ले रहा है कि मैं तुमसे आगे चला जाऊं। यहां हर आदमी हर आदमी को कंट्रोल करना चाहता है। और अगर आपको लग रहा है कि ये मेरे अधीन हो गया, तो वो आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा, इस समय। अब आपसे कुछ ले रहा है। धीरे-धीरे अपनी ताकत विकसित कर रहा है। मां-बाप बच्चों को जन्म देते हैं। बच्चे जब तक छोटे हैं, कंट्रोल में रहते हैं। जब उनकी पावर होती है, तो पीट के कहते हैं, चुप। आप ये मत समझना कि उसने एक दिन में पीटा। ये योजना बचपन से चल रही थी। मैं कब बड़ा हूं, कब पावरफुल हूं, कब इसे कंट्रोल करूं। और जब बड़ा होता है, तो कंट्रोल कर लेता है। कंट्रोल एक दिन में नहीं किया। एक दिन में उसने नहीं किया। योजना बचपन से चल रही थी। स्वभाव ही है, अधीन रहना नहीं चाहता, लेकिन दूसरों को अधीन करना चाहता है। हमेशा। बस उसकी एक जगह नहीं चलती, गुरु के यहां। गुरु ज्यादा पावरफुल है, इसलिए? नहीं। गुरु ज्यादा होता तो ये उसे पार कर देता। जीव ऐसा है कि सबसे ऊपर जा सकता है, सबसे नीचे जा सकता है। बीच में खड़ा है। ये सबको पार कर रहा है, या नीचे जा रहा है, या ऊपर जा रहा है। गुरु अगर सिर्फ ज्यादा होता, तो जीव उसे भी पार कर देता। गुरु अनलिमिटेड है। चाहे नीचे में, चाहे ऊपर में। वो तुमसे नीचे भी जा सकता है। तुमसे ऊपर भी जा सकता है। अनलिमिटेड है। गुरु का भाव रहता है कि तुम्हें अधीनता से मुक्त कराए। इसलिए जीव गुरु को स्वीकार कर लेता है। क्योंकि उसमें देख पाता है कि ये मुझे अधीनता से मुक्त कराना चाहता है। तो स्वीकार कर लेता है, कि ये मेरा हितैषी है। बाकी दुनिया में और कोई नहीं। चाहे मां-बाप, भाई-बहन, जितने भी हैं, सब एक-दूसरे पर कंट्रोल करना चाहते हैं। लेकिन गुरु एक ऐसी सत्ता है इस पृथ्वी पर, जो आपको अधीनता से मुक्त कराना चाहता है। इसलिए गुरु के यहां वो नहीं चलती। गुरु के यहां उसकी सारी पावर खत्म हो गई। अभी एक अनपढ़ भी झाड़ू मार रहा है, और पीएचडी किया हुआ भी लैट्रिन कर रहा है। वहां पावर काम नहीं करेगी, क्योंकि गुरु अनलिमिटेड है, और वो आपको अधीनता से मुक्त कराना चाहता है। ये बात उसे समझ में आ गई। बाकी लोग क्या कर रहे हैं? एक-दूसरे को अधीन बनाना चाहते हैं। ये लड़ाई राग-द्वेष की है। गुरु के यहां ये नहीं चलता। अपने घर में देखो। ऐसा हो सकता है कि लड़ाई ना हुई हो आपस में, लेकिन राग-द्वेष बनता ही रहता है। बनता इसलिए है कि एक-दूसरे को कंट्रोल करना चाह रहे हैं, बता नहीं रहे। गुरु इससे मुक्त कराता है। इसलिए गुरु के यहां उसकी वो ऊर्जा नहीं निकलती। कंट्रोल तो उसे भी करना था। शुरुआत में करना ही चाहता था, कि ऐसा प्रश्न पूछूंगा, जवाब नहीं दे पाएंगे। इतने गहरे प्रश्न हैं, आज तक कोई जवाब नहीं दे पाया, ये कैसे दे पाएंगे। कंट्रोल तो उसे भी करना था। लेकिन कंट्रोल नहीं कर पाता। एक ही जगह है। घर वाले बचपन की बात ज्यादा याद दिलाते हैं। हमारी कमी को उभारते हैं। इसलिए कि उन्हें लगता है, तुम उन्हें कंट्रोल कर रहे हो, तुम उन्हें दबा रहे हो। तब वो परिस्थिति याद दिलाते हैं, देख, तेरी अधीनता तुझे दिखाता हूं। आज तू ज्यादा पावरफुल बन रहा है, तो वो बात याद दिला के तुम्हें गिरा देते हैं। जब भी लगेगा कि तुम उनको पार कर रहे हो, उन्हें दबाना चाहते हो, तो तुम्हारी बुरी परिस्थिति याद दिलाएंगे। तुम वही हो। तब वहां चुप होना पड़ता है। गुरु अगर देख लेता है, तो समझाने के ढंग से गिल्ट में नहीं ले जाता। वहीं से उठा लेता है। गिल्ट को खत्म करता है। गिल्ट मत करो। हो गया, हो गया। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति थी। तुम उस परम स्थिति को उपलब्ध हो सकते हो। तुम में ये संभावना है। गुरु याद दिलाता है, जितना भी स्थिति-परिस्थिति में तुमने धारण किया है, तुम ये नहीं हो। और समाज बताता है, तुम ये ही हो। समाज मतलब घर वाले। हमारे लिए जितने लोग परिचित हैं, वही हमारा समाज है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23