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प्रश्नोत्तर P6-0018 · भाग 6

मां-बाप/रिश्तेदार/कलीग से लेन-देन — इस जन्म या पिछले का हिसाब? पीड़ा में ईमानदारी क्या?

भैया, अब नहीं दिया होगा तो फिर कभी दिया होगा। अगर मेरे साथ गलत कर रहा है तो कभी ना कभी तो दिया होगा। तो बस ये देखना है कि जब मैं जिसके भी साथ हूं, तो मैं उसके साथ ईमानदारी से हूं कि नहीं। बस इतनी सी बात है। नहीं, ये देखिए, मरहम नहीं। ये सच्चाई है कि अगर मेरे साथ कुछ हो रहा है तो उसका जिम्मेदार सिर्फ एक व्यक्ति है, मैं हूं। सीधी सी बात है। यही मुझे समझना चाहिए। और कोई नहीं। अगर मुझे किसी ने पीड़ा दी और मैं ईमानदार हूं पूरी तरह, तो जरूर मैंने कभी दिया था, वो लौटा दिया। बात खत्म। हां, ईमानदारी से आपको जवाब भी देना है, सात्विक तरीके से। अगर वो तामसी तरीके से आपके साथ व्यवहार कर रहा है, तो आपको सात्विक तरीके से अपना बचाव करना है। पागल बना के नहीं गया। वो अपना लेके चला। हां, अपना बनके मैंने भी अपनापन करके छुरा घोपा होगा। आज बराबर हुआ। नहीं, अब मैं भी यही है कि अगर मेरे साथ कुछ हो रहा है तो कहीं ना कहीं उसका जिम्मेदार मैं हूं। मैंने किया है। क्या मैंने किया है? हां, तभी मुझे मिल रहा है। बस मुझे इतना है कि ईमानदार रहना। ईमानदार अगर मैं रहा तो आगे की तैयारी नहीं हो रही, मैं निकल रहा हूं। और अगर मैं बेईमान रहा तो मैं भी तैयारी कर रहा हूं आगे की। और बस यही है। मैंने बस यही समझा कि भाई, यहां से निकलने के लिए एक ही सबसे सरल रास्ता है। ईमानदारी सत्कर्म। और कोई रास्ता नहीं है। तो मेरे समझ से ईमानदारी सत्कर्म मुझे अपना ही लेना चाहिए। दो लाइन के पीछे भी तो बहुत कुछ बोला हूं। उसको भी पकड़ना है। अब ये दो लाइन पे हम चल कैसे पाएं? हिम्मत कहां से आएगी? बल कहां से मिलेगा? और ईमानदारी है क्या? सत्कर्म है क्या? सब समझना पड़ेगा। है तो दो ही लाइन। किसी को दोषी मत दो। आपके कर्मों का परिणाम आपको मिला। आप किसी को दोषी मत दो। किसी पे उंगली मत उठाओ। आपके कर्मों का परिणाम आपको मिला। आप किसी और पे उंगली ना उठाओ। नहीं, उसका भी परिणाम भोगना पड़ेगा। किसी निर्दोष पे उंगली मत उठाओ। बस आपके कर्मों का परिणाम आपको मिला। आप स्वीकार करके आगे किसी पे उंगली ना उठाएं। अगर एक आदमी एक रुपया कमा रहा है और आप आगे आ जाएंगे, आपके बहुत सारे क्वेश्चन होंगे, तो आप आगे आएं। अगर मैं एक रुपया कमा रहा हूं, इधर ही आ जाओ भाई। ठीक कहते हैं, ईमानदारी से कर्म करना है। नहीं करवाओ। पिछला कटेगा नहीं। आप रुक जाओगे। भाई, आपको वहीं रुक जाओगे। तो आपको तो निकलना है। रुक जाओगे। सत्कर्म नहीं अपनाओगे। आपने ईमानदारी अपनाई और ईमानदारी से अपना खा कमा रहे हो, लेकिन पिछला खत्म कैसे होगा? पीछे भी तो बहुत कुछ तुमने कर दिया है। उससे कैसे मुक्ति पाओगे? उससे कैसे मुक्ति पाओगे? जैसे मान लीजिए एक व्यक्ति ने अपराध कर दिया और वो भाग जाए। वो अब अपराध नहीं कर रहा है, वो ईमानदारी से जीवन जी रहा है, लेकिन पिछले अपराध का तो उसे सजा भोगना पड़ेगा। उसे पुलिस खोज भी तो रही है। जो मैंने बताया, उसमें वो रुक ही जाएगा। रुक जाएगा। यात्रा रुक गई। अब वो जाके वहां जिए और पुलिस एक दिन पहुंच जाए, पकड़ ले। कहे, नहीं, हम तो यहां ईमानदार हैं, हम तो कुछ करते ही नहीं। पिछला किया है, उसका तो भोग ले। आगे तू नहीं किया, बात छोड़। तू जितने साल बाद पकड़ा जाएगा, वो सजा मिलेगी। और पुलिस खोजती ही रहेगी। तो इस पुलिस से तो भाग जाओगे, पर किससे, कहां भागोगे?

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