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प्रश्नोत्तर P6-0026 · भाग 6

लाइव देश-विदेश से लोग अलग-अलग समझ से बैठे — सबकी जर्नी?

मेरा कहने का मतलब है कि अगर आप अपने में स्थिर हो गए, तो प्रश्न खत्म हो जाएगा। आप हो। वहां बस स्थिर हो गए, तो बात ही खत्म। क्योंकि बाद में तो फिर बाहर आना पड़ेगा, और बाहर आकर फिर उलझ जाओगे। तो सुलझ के रुक जाओ, अपने आप को देख के। जब आप समझे ही नहीं, तो असर कैसे करेगी? आप समझना चाहोगे तभी। आप सात घंटे में समझ भी तो रहे हो। सात घंटे बैठे क्यों? जब समझ ही नहीं आ रहा है, तो बैठे क्यों? अगर वो समझ रहा है, तभी बैठा है। अगर वो सत्संग के लिए नहीं, किसी और के लिए बैठा हो, उसे सत्संग से मतलब ही नहीं है। उसकी समझ से ही होगा। समझ कैसे खुलेगी? अगर वो चाहेगा तो। वो चाहेगा कब? जब उसे समझना होगा। जब वो चाहेगा, तो इसका मतलब उसने अपनी जिंदगी के रस को, अपनी पूरी ऊर्जा को, अभी किसी रस में अटका रखा है। वही उसको सत्य आभास हो रहा है। वो तब समझना चाहेगा, जब उसे जरूरत लगे। अगर जरूरत नहीं है, तो आप समझाओ तो कहेगा, मुझे नहीं समझना। जब उसे लग जाएगा कि ये मेरी जरूरत है, तो बिना समझे रह नहीं पाएगा। वो तब लगती है, जब उसे जरूरत हो। जहां आप रस ले रहे थे, या तो रस नहीं मिल रहा है, तो रस और कहीं ढूंढ लोगे। तो ऑप्शन ढूंढोगे। और आप समझ गए कि इस रस में कुछ है नहीं, तो इसमें कुछ नहीं है, तो कहां है? तो वहां निकल जाओगे। खोज वहां लेके चली जाएगी। तब जिंदगी में अध्यात्म शुरू होगा। असल काम कोई किसी पे थोप नहीं सकता। कोई किसी को समझा भी नहीं सकता। बस समझने के लिए बोला जा सकता है। समझ लिए तो भी ठीक, नहीं समझे तो भी ठीक। समझने की क्षमता कोई आपको नहीं दे सकता। आपकी योग्यता के अनुसार, क्योंकि अगर आप चाहोगे तो उसके लिए काम भी तो करना पड़ेगा। चाहत के बाद काम, काम के बाद परिणाम। बस बात खत्म। चाहत में तो आदमी कुछ भी कर सकता है। फिर उसकी चाहत है, तो वो चाहत करवा ही लेगी उससे। अगर आए तो कल का भी समय है। अपने संशय को मिटाओ। यात्रा करो। खूब खुद जवाबदार इंसान बनो और आगे बढ़ो। अपना ख्याल रखिए।

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वीडियो: दिल्ली में पहला सत्संग पार्ट 2 #योगी · 2026-02-01