प्रश्नोत्तर P6-0040 · भाग 6
जब एक मिनट के लिए चुपचाप बैठ जाता हूं और शरीर से कोई कर्म नहीं कर रहा, तब भी विचार अपने आप अतीत में चले जाते हैं या भविष्य की कल्पना में। किसी ने गुस्सा दिलाया या चोट पहुंचाने की कोशिश की, एक मिनट में वह अतीत हो गया, और विचार अपने आप बनते चले जाते हैं। मैं कुछ नहीं कर रहा, मन क्रिया कर रहा है। अगर मैं कहूं कि मैं इसका दृष्टा हूं, तो यह भी धोखा लगता है, क्योंकि प्रश्न भी मन उठा रहा है और उत्तर भी मन दे रहा है। मन निमित्त है, तो प्रश्न कौन उठा रहा है? कई बार साइलेंट में बैठने पर अनुभव सा होने लगता है, फिर लगता है यह भी धोखा है, मन बार बार धोखा देता है। सृष्टि में आने के बाद से हम अपने आप को भूल गए, ऐसा लगता है। बोलने को शब्द नहीं मिलते। क्या शब्दों का सहारा लिया जाए, और बोला क्या जाए?
भविष्य में नहीं जा सकते, कल्पनाओं में जाते हो। अतीत में जाकर भविष्य का निर्माण होता है। भविष्य का भी आधार आपकी जानकारी है। अतीत में जाकर भविष्य का निर्माण होता है, और भविष्य का निर्माण तब होता है जब कोई कामना होती है। प्रत्यक्ष रूप से वह पूरी नहीं हो रही, तो उसके लिए प्लानिंग होती है। जीव प्लानिंग करता है। लेकिन आधार कहां से बनाता है? अतीत का। अतीत की घटनाओं को लेकर, और जब इच्छा है, तब जाकर भविष्य का निर्माण करता है। भविष्य इच्छा पर टिका है।
थोड़ा समय बीतते ही वह अतीत हो जाता है। मन निमित्त है। प्रश्न इसके पीछे वाला करता है, जिसको जानकारी है। अगर मन को वो दिखा दो जिसकी जानकारी आपने कभी ग्रहण ही नहीं की, तो मन उसके बारे में सोच ही नहीं सकता। एक अनपढ़ को लिखा हुआ शब्द दिखा दो। मन के द्वारा वह समझ गया कि कुछ लिखा है, लेकिन वह क्या लिखा है, फील नहीं कर पाएगा, क्योंकि उसने जानकारी नहीं ली, शिक्षा नहीं ली। लेकिन अगर एक शिक्षित आदमी है, वह चाहे या ना चाहे, उसके सामने लिखा आ गया और उसने अर्थ समझ लिया, तो फील कर पाएगा। फील करने वाला मन है क्या, बुद्धि है क्या? मन मतलब बुद्धि। बुद्धि सिर्फ जानकारी का आदान प्रदान है। बुद्धि के पास फीलिंग नहीं है। फीलिंग वैसी होती है जैसी आपको जानकारी होती है।
जैसे आंख बंद करा के आपको किसी का हाथ पकड़वाया जाए। अगर कह दिया जाए कि मां का हाथ है, तो फीलिंग अलग होगी, भले वह पत्नी का हाथ हो। और अगर पत्नी का हाथ है और बता दिया जाए कि मां का है, और बताने वाले पर पूरा भरोसा हो, एक प्रतिशत संशय भी नहीं, तो पत्नी का हाथ पकड़ने पर भी मां की फीलिंग होगी, क्योंकि जानकारी मां की दी गई। अगर हाथ खुद समझ जाता तो पत्नी को पत्नी जानकर फील करता। जैसी जानकारी दी जाती है, वैसी फीलिंग आती है। कहने का मतलब यह है कि मन सिर्फ निमित्त है। मन के पीछे आप हो।
मन धोखा नहीं देता, कभी भी। आपकी जानकारी का अभाव आपको धोखा देता है। जहां जानकारी है और प्रत्यक्ष नहीं है, वहां प्रत्यक्ष का अभाव आपको धोखा देता है।
आप भूल नहीं रहे हो। कभी कहते हो यह सामान कहां है, मैंने रखा है, लेकिन याद नहीं आ रहा। आप भूले नहीं हो। जितनी जानकारी इकट्ठा की है, वहां तक जा नहीं पा रहे। ये कभी मत समझना कि मैं भूल गया हूं। आप भूलते कुछ नहीं हो। भूलने का मतलब तो यह होता कि अब कभी याद ही नहीं आएगा। सामान मुंह पर होता है, याद नहीं आता, और कुछ मिनट या कुछ घंटे बाद कहते हो याद आ गया। कहां से याद आया? क्या भूल गए थे? उस समय मेमोरी में तो था, लेकिन क्षमता नहीं हो रही थी कि वहां तक पहुंच जाऊं। कहीं ना कहीं कमजोर पड़ गया हूं। जब चिंतन किया तो पहुंच गया। भुला नहीं था।
शब्दों को बहुत सोच समझ के बोलो। कुछ कहना चाह रहे हो और सुना ही नहीं है, तो उसे व्यक्त कैसे किया जाए? व्यक्त करो, लेकिन संभावना में व्यक्त करो, जब प्रत्यक्ष मालूम नहीं है। आप ये कह सकते हो कि मुझे अभी याद नहीं आ रहा है। यह भी संबोधन है। मैं भूल गया कहोगे, और एक घंटे बाद बता दोगे। दूसरा कहे मुझे अभी याद नहीं आ रहा, तो उसका मतलब है कि कभी याद आएगा। यही शब्द की महिमा है। मुझे अभी याद नहीं आ रहा है, यह भी शब्द ही है। इन शब्दों का प्रयोग क्यों नहीं करते? अगर मान लोगे कि मैं भूल गया, तो यही गड़बड़ी है। मुझे अभी याद नहीं आ रहा है, और मैं याद कर लूंगा। इन शब्दों का उपयोग करोगे तो भीतर ताकत मिलेगी, आंतरिक बल मिलेगा।
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