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प्रश्नोत्तर P6-0155 · भाग 6

गीता में निष्काम कर्म की शिक्षा है, शास्त्रों में लिखा तो ठीक है, पर हम अपने तरीके से ग्रहण कर रहे हैं। शास्त्र पढ़ें या क्या करें? गुरु के पास अपना पढ़ा हुआ ज्ञान लेकर जाएँ तो क्या होता है?

शास्त्रों के विषय में बात यही है। शास्त्रों में लिखा तो ठीक है, पर हम क्या कर रहे हैं, अपने तरीके से। शास्त्रों का अध्ययन मत करो। अनुसरण करो। शास्त्रों का अनुसरण किसी योग्य गुरु की शरण में जाकर करो। तुम क्या कर रहे हो? स्वयं पढ़ रहे हो, अध्ययन कर रहे हो। अपने बालक को किताब, कॉपी, पेन और गाइड भी लाकर दे दो, और कहो पढ़ो बेटा। बिना शिक्षक के वह पढ़ पाएगा क्या? ज्ञान नहीं होगा। शिक्षक वही बताएगा। गाइड में उत्तर है, वह भी बताने वाला तरीके से हल करेगा, पर शिक्षक तरीका सिखाएगा। आगे भी सवाल आएँगे। ये तो किताबी हैं। जीवन में आगे जो आएँगे, उन्हें कैसे हल करना है, यह गुरु सिखाएगा। गुरु के पास जाओगे और सब कुछ लेकर जाओगे तो कुछ नहीं होगा। गुरु के पास सब कुछ खत्म हो जाएगा। तुम लेकर बैठ ही नहीं सकते। ज्यादा दिन रहे तो तुम्हें भी खत्म कर देगा। यहाँ एक से एक महापुरुष आए, क्योंकि तुम कुछ भी बोलोगे, मेरा एक ही काम है उसे खत्म करना। मुझे मालूम है तुम नहीं बोल रहे। कहीं से मिला है, कहीं से बोल रहे हो। दूसरे की बात है। मेरे पास आए तो तीसरे को आने ही नहीं देंगे, भटकने तक नहीं देंगे। तुम कहोगे, शास्त्र, उपनिषद, वेदांत, सब इधर उधर कर रहे हो। एक जन आए थे। बोले, दो लाइन में आपने सब खत्म कर दिया। मैंने कहा, हाँ, दो लाइन में ही सब खत्म हो गया। ईमानदारी से कहो, कुछ बचा ही नहीं। सब इसके नीचे ही बोला गया है। पृथ्वी पर जितना भी बोला गया, इसके नीचे ही बोला गया। ऊपर हो तो मुझे बताओ। नहीं तो निकल जाओ। चाहे यहाँ से, चाहे वासना से। यहाँ तुम नहीं बचोगे। रहोगे तो खत्म होगे, नहीं तो भाग लोगे। वह अधिकार मुझे नहीं दिया गया कि रोकूँ। तुम्हारा कोई ज्ञान यहाँ काम आने वाला नहीं। इसलिए कितने महापुरुष आए और चले गए। मुझे बस इतना मालूम है, तुम एक परेशान इंसान हो और अज्ञानता को धारण किए हो। बस इतना मालूम है। वह कैसे छूटे, उसके लिए सत्संग सुनाऊँगा। तुम्हारा एक भी शब्द यहाँ काम नहीं करेगा।

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वीडियो: बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं ? | गुरु के बिना नाम जप ! #livesatsangyogijika · 2025-03-10