प्रश्नोत्तर P7-0096 · भाग 7
आत्मिक कल्याण की जिज्ञासा प्रबल नहीं थी, शादी परिवार वालों ने कर दी। क्या यह जबरदस्ती नहीं थी?
जबरदस्ती कोई नहीं करता। आप मुझसे छोटी हो, मैं जबरदस्ती यहां रोकूं, तो रुक जाओगी क्या? दूसरी बार पूछता हूं। मैं रोक दूं तो रुक जाओगी? पक्का बताओ। फिर मैं रोक ही लूंगा। मेरा वीडियो देखा होगा तो मेरा नेचर पता है। रुकोगी क्या? जबरदस्ती कोई किसी से कुछ नहीं करवा सकता। यह गलत बात है। लोग थोपते हैं। कोई किसी से जबरदस्ती कुछ नहीं करवा सकता। कहीं न कहीं हमारी हां होती है। हां नहीं है तो नहीं करवा सकता। कहीं न कहीं हां है, तभी करवा सकता है। आपको जीवन में जितना करना था, करते हुए देखा, होता गया। अब मैं कह रहा हूं, अब लग जाइए। कोई और जिज्ञासा बाकी हो तो जल्दी से जल्दी पूरा कर लीजिए। शादी भी हो गई, बच्चे भी हो गए, नौकरी भी हो गई, रिटायर भी हो गईं। अब कुछ बाकी हो तो वही, नाती की शादी, नाती को खिलाओ, नाती के नाती को। अब और कोई नहीं है। देख लो। पूरी तरह लग जाओ। अभी भी मौका है। कहा गया है, जब जागो तब सवेरा।
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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03