प्रश्नोत्तर P7-0100 · भाग 7
पत्नी घर के कामधंधे में लगी रहती हैं। मैं कहता हूं अब छोड़ दो, मैं चुपचाप पुस्तक पढ़ना चाहता हूं, अध्यात्म में लगना चाहता हूं, पर काम नहीं छूट रहा। सुबह सबको उठा देती हैं, पांच बजे जगाकर कपड़े धोने में लगा देती हैं। कई बार कहा, दो तीन घंटे पुस्तक पढ़ो या वीडियो सुनो, नहीं सुनतीं। रिटायर हो गए, फिर भी काम करवाती हैं। बाहर गईं तो काम वाली से काम करवा लेना कह जाती हैं। क्या यह ठीक है?
मालकिन बनने का बड़ा नशा होता है, एक जुनून। जिसको उठना होगा, वह उठेगा। सोने दो। सुबह उठ के क्या कर लेंगे? जरा सोने दो इंसान को। कोई सोना चाहता है तो सो लेने दो। यह पुराने लोगों का हाल था कि बस सुबह उठो। नींद पूरी होने दो। नींद पूरी होगी तो उठ जाएगा। जरा सोने तो दो उसे।
आलतू फालतू मत सुनो। हम कहते हैं, गुरु जी का सुनो और करो। बाकी आलतू फालतू के लिए नहीं। अब आप पूरी तरह लग जाओ। आपको देख के वह भी लगेंगे। सोए हों तो जगाओ मत। जरा सोने दो। जगाने की जरूरत नहीं। सोने दो, उठ जाएगा। पांच बजे उठ जाओ, यह लोगों का नशा है। चार बजे उठ जाओ, यह नशा है, एक परंपरा है। कोई एक बजे सोया हो तो चार बजे कैसे उठेगा? कोई आठ नौ बजे सोया हो तो चार बजे उठ सकता है। लोग कहते हैं सुबह चार बजे जागो। मैं कहता हूं, किसी की नाइट ड्यूटी हो तो वह क्या करेगा। सामान्य दिन में जो रूटीन है, उसके अनुसार चलो। अब तो रिटायर हो गए। उन्हें छोड़ दो। फिर साधना कब करेंगे? वह करेंगे। उन्हें छोड़ो। पहले उन्हें जीने दो।
आप पूरी तरह चलिए। आपको देख के वह चलेंगे। उन्हें छोड़ दो। पूरी तरह न जगाइए, न सुलाइए। जरा छोड़िए उन्हें। ऐसा तो नहीं कि वह नशेड़ी हैं। सो रहे हैं तो सोने दो। सोने गए तो उठ ही जाते हैं जल्दी। आप कहती हो बिस्तर छोड़ के काम धंधे में लगो। वही गड़बड़ है। यह मानसिकता है। यह परिवार से पाई होगी, कहीं न कहीं से मिली होगी। पुराने लोग ऐसे ही करते थे। उनका एक ही नशा रहता था, तुम्हें सुबह उठना है। कोई काम हो तो अभी उठना ठीक है। पर ऐसा नहीं करना चाहिए। वह नींद भर सोएगा, तब उठेगा। और ये तो रिटायर हो गए। क्या इनको काम पर इतना पैसा आता है? एक आदमी रख लो। इतना काम करवाने की क्या जरूरत है? इतना तो पेंशन आ रहा है। रखे भी हुए हैं। तो छोड़ो न। फिर भी उनके साथ लगी रहोगी। किचन में हमको भी लगाओगी, उनको भी। एक एक व्यक्ति को नौकरी लग जाएगी। मदद कम है तो एक और रख लो। इन्हें तो छोड़ो।
रिटायर हैं। इतने समय तक काम ही तो किया है, समय व्यतीत किया है। अब विश्राम करने दो। जिसे आप उठा रही हो, वह सुबह से शाम तक खटा है। ड्यूटी नौ से पांच थी। आप टीचर हो, सुबह ही उठती थीं। पैंतीस साल नौकरी की। पैंतीस साल सुबह से शाम तक। अब विश्राम करो। अब आराम करो। खा पी के। क्या काम है? आप यहां आए, क्या मैंने कोई काम बोला? यहां मैं किसी से सेवा नहीं करवाता। मैं कहता हूं, विश्राम करिए। अभी आपको विश्राम की जरूरत है। जब से पैदा हुए, लोगों ने एक ही काम किया, आपको खटाया। व्यक्ति जरा सा बड़ा होता है, उसे परिवार के काम पर लगा देते हैं। जरा उसे समझने लायक होने दो। जरा जीने दो। रिटायर के बाद भी आप इन्हें नहीं छोड़ रही। इनसे काम करवाने की क्या जरूरत है?
बाहर गईं, काम वाली आ गई, तो उससे काम करवा लेना कह देती हो। काम वाली ऐसा रखो कि उसका काम फिक्स हो। आपको एक एक बात बतानी पड़े, ऐसा क्यों? वह घर घर का देखा हुआ होता है, दिमाग होता है, इसीलिए साथ लगना पड़ता है, यह कहती हो। इतना मत लगो। मैं देख रहा हूं, लोग बिना मतलब के काम में लगे हैं। इसीलिए यहां मैं कोई सेवा नहीं देता। सारा काम मैं खुद करवाता हूं। कोई सेवा मांगता भी है तो मैं कहता हूं, नहीं। आप सेवा मत करो। आप यही करके तो आए हो। आप बस अपना काम करो। यहां कोई सेवा नहीं है। विश्राम करो। लोगों को विश्राम की बहुत जरूरत है।
इतने साल नौकरी की। अब तो जीने दो। आप भी बढ़िया जीवन जियो, और इनको भी जीने दो। पेंशन आप भी पा रही हो, आप भी पा रहे हो। ईमानदारी से सत्कर्म में लग जाओ। एक दूसरे को सहयोग दो। निकलो, और निकालो। एक दूसरे की सहायता करो। एक दूसरे के बंधन मत बनो, कि तुम लेट उठे, तुम जल्दी उठे। जब नींद खुले तब उठ जाना। मुझे लगता है आदमी दिन भर सो नहीं सकता, चाहे तो भी नहीं सो सकता। नींद किसी के बस में नहीं है। अच्छी नींद छह सात घंटे हो जाए, तो फिर बिस्तर पर सो नहीं पाएगा। पर कोई नींद में है, करवट बदल रहा है, और आप उठो उठो कह रही हो, तो उठाना नहीं चाहिए। इमरजेंसी आ जाए, आपातकाल आ जाए, जान की बात आ जाए, तब तुरंत उठा सकती हो।
कहने का तात्पर्य यह है कि विश्राम कर लीजिए। यह अकेले आपकी बात नहीं। मैं हर व्यक्ति से कह रहा हूं। बस काम काम। नाम, शोहरत, पैसे, प्रॉपर्टी। एक से दो बंगला, दो से चार, पूरी बिल्डिंग। पता नहीं पूरा संसार खरीदना चाहते हो। समझ में नहीं आता, जीने के लिए हमें क्या चाहिए। प्रॉपर्टी पर प्रॉपर्टी बनाते चले जा रहे हैं। मैं देख के आ रहा हूं, लोग कहते हैं मैं परेशान हूं। उनके पास करोड़ों की जायदाद है। यही देख के अभी आया हूं। वह कहते हैं मैं परेशान हूं, और मुझे हंसी आ रही है। करोड़ों की जायदाद है। बेच के अपनी परेशानी दूर कर लो। उसको लेकर क्या करोगे? नहीं, रखेंगे। इस परेशानी से लड़ेंगे। रख के क्या करोगे? कहते हैं, बच्चों के लिए। रखेंगे, जाने नहीं देंगे, क्योंकि खानदानी है, पुश्तैनी है। बेचेंगे तो नाम खराब हो जाएगा। और खुद सड़ रहे हैं, शारीरिक भी, मानसिक भी। करोड़ों की जायदाद है, मैं देख के आ रहा हूं। कहते हैं मैं परेशान हूं। हम कहते हैं बेच दो, बेचकर अपने जीवन में उपयोग करो। नहीं बेचेंगे। नाम खराब हो जाएगा। अरे भाई, तेरा नाम है कहां अभी? होता तो खराब होता। तुम्हारा नाम ही नहीं है। नाम होने का तुम्हें भ्रम है। आपने भी ऐसी घटना देखी होगी। करोड़ों की प्रॉपर्टी है, और दस बीस हजार के लिए परेशान हैं। कहते हैं नहीं बेचूंगा, बेचूंगा तो नाम खराब हो जाएगा। अरे, तेरा नाम कहां रहा, जो दस बीस हजार मांग रहा है। नाम तो उसी समय खत्म हो गया। तुझे लग रहा है मेरी शान है। जैसे ही हाथ फैलाया, शान वहीं खत्म हो गई। अभी भी शान बाकी है क्या? यह मैं अभी देख के आ रहा हूं।
हमारे संपर्क में ऐसे लोग हैं, जिनके पास आठ दस किलो सोना है, और खुद उधार लेते हैं। दुकान वाले पीछे घूमते हैं, मुझसे नंबर मांगते हैं। उनका नंबर क्या है? क्यों भाई, पेमेंट लेनी है? मैंने उनसे कहा। मुझे हंसी आती है, भाई यह क्या कर रहे हो। इसलिए इन्हें आराम करने दो। आप भी साधना करिए। पूरी तरह लग जाइए।
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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03