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नया-नया संन्यासी — सोमनाथ, जूनागढ़ और ट्रेन वाले महाराज जी

3 सितंबर 2026 · अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढ़ाएं? · 46:35 से

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मुख्य बातें

ट्रेन में बातचीत

मैं नया-नया संन्यासी हुआ था। मैं गया था सोमनाथ, गुजरात में। हमें एक महाराज जी रात को मिले, हमने उन्हें कुछ पैसे दिए। फिर ऐसा हुआ कि जूनागढ़ गया, और स्टेशन पर आया तो हमारी उनकी फिर मुलाकात हो गई। मैंने कहा, महाराज जी, मुझे पहचाना? रात को आपको पैसा दिया था। बोले, हां, याद आ गया। हम लोग ट्रेन से अहमदाबाद की तरफ, मुंबई की तरफ जा रहे थे — एक ही ट्रेन में चढ़े और एक ही जगह सीट मिल गई।

बात होने लगी। मैंने कहा, महाराज जी, कुछ हुआ? उन्होंने कहा, हां-हां, एकदम ध्यान लगता है, बहुत कुछ हुआ। मैंने कहा, महाराज जी, मैं तो नया-नया हूं, मेरे को कुछ समझ में नहीं आ रहा। एक तरफ जवानी पागल करती है — 25-26 साल में संन्यास हुआ, जवानी चरम सीमा पर थी, ब्रह्मचर्य रुक नहीं रहा था।

“सच में कुछ हुआ?”

फिर हमारी बात और होने लगी। मैंने कहा, महाराज जी, आप बताइए, सच में कुछ हुआ? बोले, कुछ नहीं। तो मैंने कहा, महाराज जी, जब कुछ नहीं हुआ तो आप वापस क्यों नहीं गए?

बोले, ऐसा है — कुछ नहीं हुआ, यह पता चलते-चलते जवानी चली गई। अब अगर लौटूं तो लोग कहेंगे भगोड़ा। अब शादी-विवाह तो होगा नहीं, 40 के ऊपर हो गए, गांव वाले, घर वाले जीने नहीं देंगे — तो जाऊं कहां? यहां मिल तो रहा है। 99% लोगों की यही हालत है।

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