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“मैंने कुछ नहीं छोड़ा” — घर, मां और शादी का प्रश्न
25 अगस्त 2024 · योगीजी की आत्मकथा — अज्ञान से ज्ञान तक, खोज में कुछ अनुभव की बातें · 2:17:07 से
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मुख्य बातें
- घर नहीं छोड़ा, मां से मिलते रहे, आज भी जाते हैं — “लोगों ने मुझे छोड़ दिया, क्योंकि मैं बेकाम का हो गया।”
- मां ने कहा शादी करो — “जिस दिन जरूरत होगी कर लूंगा; अभी मेरी जरूरत यह है।”
- “संन्यासी बनने के लिए संन्यासी नहीं हुआ था, समझने के लिए हुआ था।”
घर नहीं छोड़ा
जिसके लिए मैंने जीवन छोड़ दिया, अगर मैं किसी व्यक्ति से बात कर रहा हूं तो उसे इतनी इज्जत देता था कि जिसे खोज रहा हूं वह भी खड़ा हो जाए और कहे चलो, तो मैं कहूंगा — रुको, इसकी बात खत्म हो जाए तब चलूंगा।
मेरे जीवन में मैंने कुछ नहीं छोड़ा — लोगों ने मुझे ही छोड़ दिया, क्योंकि मैं बेकाम का हो गया; मेरे पास कुछ नहीं, तो पकड़ेगा कौन? तो आखिर में मैं अपने आप से मिल गया। मैंने घर भी नहीं छोड़ा, अपनी मां तक जाता रहा, घर पर मिलता रहा, आज भी जाता हूं। मुझे कुछ छोड़ना नहीं था, कुछ पकड़ना नहीं था — बस समझना था, जीना था।
शादी का प्रश्न
जब इस लाइन में आया तो मां ने कहा, शादी करो। मैंने कहा, जिस दिन जरूरत होगी, कर लूंगा; अभी मेरी जरूरत यह है — और आपके पास अनेक बहुएं हैं, आपका वंश चल ही रहा है। मैंने उनसे यह नहीं बोला कि नहीं करूंगा।
संन्यासी होने के बाद परिचय वालों ने पूछा, क्या आप शादी नहीं करोगे? मैंने कहा, आपसे कोई एग्रीमेंट थोड़ी किया है। अगर मैं वह जीवन छोड़कर संन्यासी हो सकता हूं, तो जरूरत हुई तो यह भी छोड़ सकता हूं। मैं वहां कुछ बनने नहीं गया था, कुछ समझने गया था — जैसे विद्यार्थी शिक्षा लेने स्कूल जाता है और बाहर आकर वह कपड़े उतार देता है। मैं संन्यासी बनने के लिए संन्यासी नहीं हुआ, समझने के लिए हुआ था।