JY-0010 · खोज
2019 — नर्मदा तट पर जब एक महात्मा ने मारा
25 अगस्त 2024 · योगीजी की आत्मकथा — अज्ञान से ज्ञान तक, खोज में कुछ अनुभव की बातें · 30:31 से
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मुख्य बातें
- सत्संग सुनने गए, “नर्मदे हर” कहा तो एक महात्मा ने सीने पर तीन बार मारा — फटे कपड़ों के कारण।
- गुस्सा आया, फिर उस गुस्से को देखा; कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
- “उनके लिए कोई मलाल नहीं — सब अपनी-अपनी स्थिति में जी रहे हैं।”
घटना
ओंकारेश्वर से ऐसे-ऐसे यात्रा होती रही। एक बार नर्मदा तट पर घूम रहा था, एक बंगाली बाबा साथ थे। उन्होंने कहा, बाहर सत्संग हो रहा है, परमात्मा की चर्चा हो रही है, चलो। दो महात्मा चर्चा कर रहे थे — महात्मा इसलिए कहना पड़ रहा है कि वो भेष है; मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि भेष के अंदर महात्मापन कम, भिखारीपन ज्यादा हो गया है।
मैं गया और बोला, महाराज जी, नर्मदे हर। उन्होंने ऐसे किया तो लगा कि ये क्रोध में हैं। जब मैंने दोबारा बोला तो उन्होंने उठकर इतनी तेज से मेरे सीने पर मारा कि मैं पीछे चला गया; फिर दोबारा मारा, लोग पकड़ने लगे तो तीसरी बार मारा। यह 2019 की घटना है, मेरा आखिरी समय चल रहा था।
गुस्से को देखा
मैंने भी गुस्से में आकर कहा, महाराज जी, बुढ़ापे में हड्डियां नहीं जुड़तीं। लेकिन मैं तो खोज में था — फिर मैंने उस गुस्से को देखा कि मुझे गुस्सा नहीं करना चाहिए, और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बहुत समय तक मेरा सीना दर्द हुआ। उनकी उम्र लगभग 60 होगी — 60 साल में भी उनका गुस्सा नहीं गया।
उन्होंने मुझे इसलिए मारा कि मेरे फटे कपड़े थे; अगर मैं बढ़िया कपड़े, चेन, घड़ी पहने होता, कार होती, तो तुरंत उठकर कुर्सी देते। आज भी घटना बता रहा हूं, लेकिन उनके लिए मेरा कोई मलाल नहीं — वे जिस स्थिति में थे, उन्होंने वैसे जवाब दिया। यहां कोई गलत है न सही, सब अपनी-अपनी स्थिति में जी रहे हैं — यह बाद में समझ में आता है।