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परिक्रमा मार्ग में नदी में गिरे — “मैं परिक्रमावासी नहीं हूं”
19 अप्रैल 2025 · हमारे अंदर कितनी अच्छाई है, उतनी ही बुराई है क्या? · 22:37 से
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मुख्य बातें
- एक बार जाते हुए नदी में गिर गए, उंगली पत्थर से कट गई, खून बह रहा था, जेब में एक रुपया नहीं।
- रास्ते में परिचित हुए व्यक्ति ने कहा, इलाज करा देते हैं, पैसे बाद में ले लेंगे।
- डॉक्टर बोले, परिक्रमावासी से पैसा नहीं लेता — “मैं परिक्रमावासी नहीं हूं, भ्रमण कर रहा हूं।” फिर भी पैसे नहीं लिए।
घटना
एक बार की घटना है — मैं जा रहा था तो नदी में गिर गया, और मेरी यह उंगली पत्थर से कट गई। एकदम खून निकल रहा था, और मेरी जेब में एक रुपया नहीं। रास्ते में, परिक्रमा मार्ग में, किसी से परिचय हो गया था; बोला, चलो चलते हैं, इलाज का पैसा तुमसे ले लेंगे, बाद में हम तुम्हें मंगाकर दे देंगे।
हम दवाखाने गए, उसने मेरी पट्टी बांधी। मैंने पूछा, डॉक्टर साहब, कितना हुआ? बोले, मैं परिक्रमावासी से पैसा नहीं लेता। मैंने कहा, मैं परिक्रमावासी नहीं हूं, मैं भ्रमण कर रहा हूं। तो बोले, नहीं, आपसे भी नहीं लेंगे। मैंने कहा, ठीक है, मत लो, आपकी मर्जी — बात खत्म।
उन्होंने मुझे देखा, मेरे जीवन को देखा, मेरे त्याग को देखा।