JY-0012 · उपलब्धि
परिक्रमा वाले महाराज जी, “एक करोड़” का प्रस्ताव, और 2020 में अपने आप हो जाना
25 अगस्त 2024 · योगीजी की आत्मकथा — अज्ञान से ज्ञान तक, खोज में कुछ अनुभव की बातें · 39:59 से
वीडियो में यहीं से देखें (39:59)ऐप में खोलें
मुख्य बातें
- भूखे थे, एटीएम से पैसा नहीं निकला; नर्मदा परिक्रमा वाले एक महाराज जी के साथ चल दिए।
- “तुम्हारा एक करोड़ में आश्रम हो जाएगा” — “मुझे आत्मज्ञान के अलावा कुछ नहीं चाहिए।”
- 2020 में भंदा गांव में अपने आप हो गया — “प्रश्न हट गए, उत्तर हो गए।”
महाराज जी के साथ
आखिरी समय चल रहा था — सब खत्म हो गया था, और खत्म करने वाला भी मैं था। मुझे कुछ चाहिए भी नहीं, और जो चाहिए वो मिल नहीं रहा। रोड पर एक महाराज जी आते देखे, उनके पहनावे ने मुझे आकर्षित किया। बातचीत हुई, बोले चलो मेरे साथ, तो मैं चल दिया। भूख बहुत लगी थी, एटीएम से पैसा निकालने गया था पर निकाल नहीं पाया था। वे नर्मदा परिक्रमा में थे।
होटल में भोजन की थाली के लिए कैश नहीं था, और महाराज जी से कहता तो वे देने लगते — इसलिए नाश्ता ही किया, होटल वाले ने पैसा भी नहीं लिया। फिर उन्होंने कहा, तुम्हारा एक करोड़ में हो जाएगा — आश्रम। मैंने कहा, महाराज जी, एक करोड़ नहीं चाहिए; मुझे आत्मज्ञान के अलावा कुछ चाहिए ही नहीं, यह मैंने अपने जीवन में पक्का कर लिया है। वे योग्य थे, कुछ तो थे — यह बात मुझे बाद में समझ में आई।
“पूरे भारत में कोई आत्मज्ञान नहीं करवा सकता”
रास्ते में यात्रा करते-करते आगे आए, एक हनुमान मंदिर में उन्होंने मेरा पांव छुआ और मैंने उनका। बोले, मैं कुछ देखकर तुम्हारे साथ चला हूं; मैंने कहा, महाराज जी, मैं भी कुछ समझकर आपके साथ चला हूं। आगे बढ़े तो बोले, तुम्हें पूरे भारत में कोई आत्मज्ञान करवा नहीं सकता। मैंने कहा, भारत में तो आप भी हो। जिस लिए निकला था, हुआ नहीं। मेरे पास एक भी रुपया नहीं था, 9 किलोमीटर पैदल जाना था — निकल गया। उन्होंने मुझे रास्ते में कहा था — भक्त और भूत पर विश्वास कभी मत करना; उस समय बात समझ में नहीं आई थी। उन्होंने मुझसे एक रुपया भी नहीं लिया।
फिर मैं मुंबई गया, दिवाली के बाद फिर यहीं आया। एक बंगाली बाबा मिले, बोले, मैं इतनी यात्रा कर रहा हूं, आप जैसा पूछने वाला नहीं मिला, चलो मेरे साथ — कोई भी कहता इधर चलो तो मैं चल देता था, क्योंकि मेरे पास जाने के लिए कहीं था ही नहीं।
2020 — अपने आप
फिर उसके बाद अपने आप 2020 में वो हो गया। उस समय मैं भंदा गांव में था, ऐसे ही एक रसोई घर में गया तो वहां के चरवाहे बोले, आओ, यहीं भंडारी का काम करो, या परिक्रमा उठा लो, हम पूड़ी, घी, कपड़े सब मंगा देते हैं। फिर बात की — उस बात पर उन लोगों को अभी भी शर्म आती है कि वे क्या समझ बैठे थे।
फिर उसके बाद हो गया, समझ में आ गया, बात खत्म हो गई — प्रश्न हट गए, उत्तर हो गए। लेकिन अपने आप हुआ। मेरे जीवन का अनुभव यह है कि अगर आप पक्के खोजी हो, तो कोई मिले या न मिले, प्रकृति स्वयं गुरु है, और आखिर में वही आपको सिखा देगी।