JY-0017 · आरंभ
मां और परिवार — योग्यता से मानते हैं, और आखिर में मां का सबसे प्यारा
15 जून 2026 · हर मोड़ पर बदलाव है, वही तो ज़िंदगी है · 6:09 से
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मुख्य बातें
- परिवार में अनेक भाई थे; मां का लगाव उस बेटे से ज्यादा था जो गाने और रामायण पढ़ने में अच्छा था।
- इससे समझ आया कि लोग योग्यता से मानते हैं, चाहे वह मां ही क्यों न हो।
- आखिर में मां की हर इच्छा अपनी सामर्थ्य से पूरी की — और मां ने कहा, इन्होंने मुझे फूल की तरह रखा।
परिवार में देखा
उस समय मुझे परमात्मा, भगवान के अलावा कुछ नहीं चाहिए था, क्योंकि मुझे सब समझ में आ गया था कि समाज में क्या-क्या हो रहा है, लोग किसको, कब, किस स्थिति में मानते हैं — परिवार को लेकर, मां, बहन, भाई को लेकर।
हमारे परिवार में अनेक भाई हैं। मां का लगाव एक बेटे से ज्यादा था, क्योंकि वह गाना गाने में अच्छा था, रामायण पढ़ने में अच्छा था, उसे गांव-समाज सम्मान देता था, सुंदर भी था — तो पूरे परिवार का लगाव उसके प्रति बहुत ज्यादा था। मुझे लगा, यहां लोग योग्यता से मानते हैं, चाहे वो मां हो।
आखिर में
शुरू में तो मैंने यह देखा, लेकिन आखिर में मेरे द्वारा मां की हर इच्छा पूरी हुई — जितना उन्होंने बोला, मेरी जितनी क्षमता और सामर्थ्य थी, मैं करता गया। मैंने कहा, देख, सबका देख लिया ना, अब मेरा देख — चल, तुझे मैं कोई कमी नहीं होने दूंगा। मां ने कहा, भैया, जैसे आप कहोगे वैसे करूंगी।
आखिर में मैं उनके लिए सबसे प्यारा हो गया — कर्म से। क्योंकि आखिर में उन्होंने यही बात कही कि इन्होंने मुझे फूल की तरह रखा।