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काल भैरव मंदिर की रात — शराबी का पैसा पुजारी को, और ट्रेन में भूख
6 जुलाई 2026 · मैं कहां हूं? — कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग, 5 जुलाई 2026 · 1:38:09 से
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मुख्य बातें
- भोजन करें तो मुंबई का किराया नहीं, किराया दें तो भोजन नहीं — ज्योतिष से पैसा कमा सकते थे, पर नहीं किया।
- रात को श्मशान के पास काल भैरव मंदिर में दो शराबी हाथ दिखाने आए और सारे पैसे छोड़ गए — सुबह वह सारा पैसा पुजारी को दे दिया।
- ट्रेन में सब खा रहे थे, पूछने पर कहा “भूख नहीं है”; पैसा आने पर स्टेशन पर दौड़कर एटीएम से निकाला — “तब मुझे अपने त्याग का पता चला।”
उलझन
स्थिति यह थी कि अगर मैं भोजन करूं तो मुंबई जाने का किराया नहीं रहेगा, और किराया देकर मुंबई जाऊं तो भोजन नहीं कर सकता। मुझे ज्योतिष आता है, बहुत सारी चीजें आती हैं — हाथ देखकर, कुंडली देखकर वही पैसा पैदा कर सकता हूं; किसी को भी पकड़ लो, दे ही देगा। लेकिन यह नहीं कर सकता। लेकिन भूख तो भूख होती है।
मंदिर की रात
रात को काल भैरव मंदिर में बैठना था, दूसरे दिन सुबह निकलना था। वहां श्मशान था; उस मंदिर का पुजारी रात को नहीं रहता था, तो मैंने वहीं विश्राम किया। रात को दो लोग शराब पीकर आए, बोले मेरा हाथ देखो। मैंने कहा, मुझे यह सब नहीं देखना। उन्होंने जिद की, तो कुछ न कुछ बता दिया।
जैसे ही बताया, उसने पर्स निकाला और जितने पैसे थे, सब रख दिए। मैंने कहा, यह पैसा मैं लूंगा ही नहीं, आप इसे लेकर जाओ। वह अपने साथी से बोला, चल, एटीएम से और निकालकर देते हैं। लेकिन वह माना नहीं और पैसे वहीं रखकर चला गया। सुबह मैंने वह सारा पैसा पुजारी को दिया और वहां से चला गया। अगर मुझे अपने आप को समझाना होता कि यह पुजारी का पैसा थोड़ी है, यह तो मेरे हाथ देखने का दिया है — तो समझा लेता; बेईमानी में भी हम अपने आप को ईमानदार बना लेते हैं। लेकिन नहीं लेना है तो नहीं लेना।
ट्रेन में
तो मैं भूखा आया। फोन लगाता रहा; एक समय उनका फोन लगा और उन्होंने बैंक में पैसा डाला। दो-तीन दिन का रास्ता था। ट्रेन में सामने सब खा रहे थे, लोगों ने मुझसे खाने को पूछा भी, लेकिन जब मेरे पास नहीं था तो मैंने कहा, मुझे भूख नहीं है।
जिस स्टेशन पर पता चला कि ट्रेन 20 मिनट-आधा घंटा रुकेगी, मैंने साथ वाले से कहा, टिकट तो है ही, अगर मैं न आ पाऊं तो तू चले जाना। दौड़कर एटीएम से पैसा निकालकर लाया, फिर मैंने भोजन किया। तब मेरे त्याग का मुझे पता चला।
इसी सत्संग में आगे विरार की बरसाती रात भी (8 महीने के फलाहारी व्रत के साथ) — देखें JY-0005