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विरार की बरसाती रात — जब मृत्यु को स्वीकार किया

25 अगस्त 2024 · योगीजी की आत्मकथा — अज्ञान से ज्ञान तक, खोज में कुछ अनुभव की बातें · 55:21 से

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मुख्य बातें

खाने-दवा का अभाव

मैं अपने अनुभव से बता रहा हूं — एक बार की घटना है। मैं साधना में था, उस समय व्रत रखता था, कमरा ले लिया था, उसमें साधना कर रहा था। जो मुझे पैसा देते थे, वे कहीं बाहर चले गए थे। अब मेरी स्थिति यह हो गई कि खाने के लिए जो मुझे चाहिए था, वो नहीं था। एक-दो दिन शक्कर पीकर रहा। चावल भी था, नमक भी था, इंडक्शन भी था। मैं एक ही कपड़ा पहनता हूं; शुरुआत में शरीर में इतने घाव हो जाते थे, और अब दवा खरीदने के लिए भी पैसा नहीं था।

ऑप्शन मेरे पास अनेक थे — उधार देने के लिए दुकानदार तरसते थे। एक स्टेशन बाद नालासोपारा में मेरी बहन रहती थी और मैं विरार में साधना कर रहा था। मुझे बस एक फोन करना था, लेकिन मैंने कहा, नहीं, अब कोई ऑप्शन यूज़ नहीं करेंगे, देखेंगे होता क्या है।

उस रात का चुनाव

फिर कमरे में सो रहा था, बरसात आई और पानी टपकते-टपकते मेरे बिस्तर तक आ गया। मैं उठा और कहा, क्या मुझे सोने भी नहीं दोगे? मैं बहुत रोया अपने इष्ट से — मेरे इष्ट मां काली और काल भैरव रहे। जैसे आप लोगों से बात कर रहा हूं, वैसे उनसे बात करने लगा: तुझे शक है तो परीक्षा ले ले, लेकिन मुझे मुझ पर शक नहीं है, क्योंकि मैं तेरे भरोसे निकला हूं।

उस रात ऐसा लगा कि आज मैं खत्म हो जाऊंगा। मेरे जीवन में जितने लोगों ने सेवा में सहयोग किया था, उन्हें मैंने आशीर्वाद दिया और कहा कि मैं यह चावल पकाकर, नमक मिलाकर नहीं खाऊंगा, चाहे कुछ भी हो जाए। एक तरफ जीवन था, एक तरफ मौत — और मैंने मृत्यु का चुनाव किया, जरा सा भी संशय नहीं था।

आवेश में, जज्बात में, दुख में मरना सरल है — वे अपने दुख से बच रहे होते हैं। लेकिन समझ के साथ, जब जीने का विकल्प भी सामने हो, मौत को स्वीकार करना इतना सरल नहीं। उस रात मैंने पूरी तरह मृत्यु को स्वीकार किया। लेकिन सुबह हुई, मेरी भी सुबह हुई — क्योंकि मैंने जीवन में पक्का किया था, कुछ मिले या न मिले, मुझे आत्मज्ञान चाहिए। फिर ऐसी कई सुबह होती रहीं। जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं।

इससे जुड़े प्रश्नोत्तर

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गुरु जी, साधना के दौरान जब खाने और दवा तक का अभाव हो गया, तब आपने क्या किया?

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साधना काल में ऐसी कौन सी परीक्षाएं आती हैं, जिनका पहले से अनुमान नहीं हो सकता? जगह से निकाल दिया जाए, तौलिया चुराने का इल्जाम लग जाए, या धन और आश्रम का लालच दिया जाए, तब साधक कैसे रहे?

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गुरु जी, आपकी साधना काल में परीक्षाएं कैसी हुईं?

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गुरु जी, आपकी इष्ट मां काली रहीं — आपका देवी साधना से क्या संबंध है?