JY-0026 · खोज
इंदापुर के फलाहारी महाराज और गाड़ी वाले महाराज — जब उत्तर नहीं मिला
10 अप्रैल 2024 · ईश्वर सर्वव्यापी है, इसका क्या मतलब है? · 9:09 से
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मुख्य बातें
- पुणे के पास इंदापुर में 40 साल से फलाहारी एक प्रसिद्ध महाराज से रोते हुए मार्ग पूछा — “जिस लिए आप आए हो, मैं वह काम नहीं करता।”
- मध्य प्रदेश में कई दिन रुककर, जाती गाड़ी की खिड़की पर आंसुओं के साथ पूछा — कोई जवाब नहीं मिला।
- तभी संकल्प किया: जिस दिन समझ आएगा, खुद लोगों तक पहुंचकर उनके हर प्रश्न का उत्तर दूंगा।
इंदापुर
मैं आपको अपने जीवन की कुछ घटनाएं बता रहा हूं — जब मैं खोज में था, तो कई जगह गया; यह कोई एक-दो साल की घटना नहीं है, इसलिए पूरी तरह विस्तार से तो नहीं बता सकता। खोज में जब मैं महाराष्ट्र में इंदापुर पहुंचा — पुणे के पास है — तो लोगों ने कहा कि आपके कोई भी प्रश्न हैं तो वे उत्तर दे देंगे। वे लगभग 40 साल से फलाहारी थे, क्षेत्र में उनका नाम था। मैं बहुत खुश हुआ कि मेरे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे।
गया तो वे आश्रम में नहीं थे। मैंने तय किया कि जब तक नहीं आएंगे, बैठा रहूंगा — कई घंटे बैठा रहा। जब वे आए तो मैंने साष्टांग प्रणाम किया, आंखों से आंसू गिर रहे थे, और कहा, मुझे मार्ग बताइए। उन्होंने कहा, जिस लिए आप आए हो, मैं वह काम नहीं करता। मैं उनसे नहीं बोल सका कि फिर यह भेष किस लिए लिया है — मैं कोई भौतिक वस्तु के लिए नहीं आया था, आत्मज्ञान कैसे हो, यह पूछने आया था। मैं वहां से रोते हुए आगे बढ़ गया।
गाड़ी की खिड़की पर
फिर मैं मध्य प्रदेश में एक जगह आया; किसी ने कहा, वहां आपके उत्तर मिल जाएंगे। कई दिन वहां रुका। महाराज जी की गाड़ी जा रही थी, तो मैं गाड़ी के पास खड़ा हो गया — कांच खुला था — और कहा, महाराज जी, मुझे आध्यात्म का मार्ग बताइए, आत्मज्ञान कैसे हो। मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे; उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, कुछ देर बाद गाड़ी चली गई।
जब मैंने इस दुख, इस पीड़ा को झेला, तो कहा — जिस दिन मुझे समझ में आ गया, मैं लोगों तक पहुंचकर ज्ञान दूंगा; ऐसा नहीं कि मुझे खोजकर कोई आए, मैं खुद किसी भी तरीके से लोगों तक पहुंचूंगा और उनके हर प्रश्न का उत्तर दूंगा, वह भी प्रत्यक्ष। जिस काम के लिए मैंने प्रयास किया था, वही काम कर रहा हूं।