आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

JY-0027 · खोज

ओंकारेश्वर का आश्रम छोड़कर नर्मदा तट पर ठंडी रात

20 जुलाई 2026 · हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग, 20 जुलाई 2026 · 2:03:37 से

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मुख्य बातें

घटना

मैं एक घटना बता रहा हूं, इससे आप समझ जाइए। मैं खोज में था, ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) में एक आश्रम में गया — एक व्यक्ति ने भेजा था कि उन महाराज से मिलोगे तो वे कुछ बताएंगे। लोगों ने कहा, कोठारी के पास जाओ। कोठारी ने कहा, खा लो, आराम से यहां रहो, अभी महाराज हैं नहीं, जब आएंगे तो देखा जाएगा।

रात के लगभग 8 बज रहे थे, ठंड का समय था, मेरे कपड़े फटे हुए थे। मैंने कहा, भाई, मैं यहां खाने-पीने तो आया नहीं हूं; जब वे हैं ही नहीं तो यहां क्यों रुकना? रात तो गुजर जाएगी, लेकिन जवाब नहीं मिलेगा — शरीर के लिए मैं वहां क्यों रुकूं? तो मैं उस दायरे से बाहर गया, और नर्मदा तट पर ठंड के महीने में रात भर बिना बिस्तर के सोया, क्योंकि वहां मेरी खोज थी।

अगर मैं उस रात वहां रुक जाता, तो मेरे लिए आत्मज्ञान जरूरी नहीं था। मेरे लिए सबसे जरूरी आत्मज्ञान था।

इससे जुड़े प्रश्नोत्तर

P21-0137

गुरु जी, जब आप हमारी तरह साधक थे, तब क्या आपको लगता था कि आपको आत्मज्ञान हो जाएगा?