JY-0031 · उपलब्धि
बहन के घर का अनुभव — “जब तक काम का था, भगवान था”
20 जुलाई 2026 · हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग, 20 जुलाई 2026 · 45:47 से
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मुख्य बातें
- बहन के यहां रहते थे; जब तक पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र से उन्हें लाभ होता था, वे फोटो लगाकर पूजा करते थे।
- सब बंद किया तो भाव बदल गए; 24 फरवरी 2020 को कमरे में गए और 1 जुलाई को आसमान देखा।
- बहुत बीमार हुए — चक्कर, उल्टियां; “उनकी आंखों में देखा कि अब मैं उनके लिए बोझ हूं।”
घटना
यह मेरे साथ खुद हुआ है। मैं अपनी बहन के यहां रहता था। जब तक पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र करता था, उनको लाभ होता था, मैं उनके लिए भगवान था। मैंने तो शुरुआत आध्यात्म के लिए ही की थी, कि मुझे कुछ नहीं चाहिए — लेकिन रास्ते में मुझे सिद्धियां मिलती गईं। जब मैं उनके लिए कर रहा था तो सब खुश थे, मेरा फोटो लगाकर पूजा भी करते थे। लेकिन जैसे-जैसे मैंने सब बंद कर दिया, उनके भाव बदल गए।
24 फरवरी 2020 को मैं कमरे में गया और 1 जुलाई को आसमान देखा। इतने दिनों तक मैंने देखा कि वे मुझसे घिन्ना रहे हैं। मेरा आखिरी समय चल रहा था, और मैं यह देख पा रहा था — क्योंकि मैं उनके काम का नहीं रह गया था; अब मैं अपने काम का हो गया था।
उसी समय मैं इतना बीमार हो गया कि आंख खोलूं तो पूरी बिल्डिंग घूमती, खूब उल्टियां, पेट में कुछ नहीं टिकता था। उनकी आंखों में देखा कि अब मैं उनके लिए बोझ हूं — भगवान बोझ है। अभी भी फोटो लगाकर पूजा करते हैं। भगवान कब तक मान रहे थे? जब तक मैं काम का था।