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प्रवचन PV01-0005 · भाग 1

ये अध्यात्म है, इतना सरल ना समझो — सचेत होकर यात्रा, और भाव वहीं रखो जहां कद्र हो

11 जुलाई 2025 · "ये आध्यात्म है | इतना सरल ना समझो इसे ! #योगीजी_का_सत्संग

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मुख्य बातें

जिसके पास सीखने गए, उसी को चुप करा दिया

कभी भी आपको लगे कि सामने वाला आपकी बात समझ नहीं पा रहा, तो उस व्यक्ति के पास मत रहिए, क्योंकि आप उससे ऊपर निकल गए; फिर उससे ऊपर कोई खोजो, उसके यहां आप समय बर्बाद कर रहे हो। अगर यह बात मुंह से निकल जाए तो वहां कतई मत रुकना, क्योंकि आप तो बहुत आगे निकल चुके हो।

गौर से जिंदगी को जियो, बहुत गौर करो। अगर आप जिसके पास सीखने गए हो, उसी को कह रहे हो कि छोड़ो, चुप रहो — तो बात ही खत्म कर दी तुमने। अब बचा क्या?

ये अध्यात्म है, इतना सरल ना समझो

ये अध्यात्म है, इतना सरल ना समझो इसे। लाखों-करोड़ों चलते हैं, एकाध पहुंचता है; बाकी सब रास्ते में इधर से उधर हो जाते हैं। बहुत सचेत, सतर्क होकर आपको यात्रा करनी पड़ेगी।

जरा समझिए — कब मैं किसको क्या बोल रहा हूं, इस शब्द का मीनिंग क्या है, क्या प्रभाव पड़ेगा, क्या असर करेगा, वह माहौल क्या है, स्थिति-परिस्थिति क्या है, मेरे सामने बोल कौन रहा है। इसीलिए मैं सचेत कर रहा हूं कि शब्दों का उच्चारण, बोलचाल बहुत सोच-समझकर करिए।

ग्रुप छोड़ो, अपने आप को समझो

मोबाइल में आप कर क्या रहे हो? आप अपने आप को समझो; ये वीडियो, ग्रुप-व्रुप सब छोड़ो। तुम जिसके लिए आए, वह करो। मोबाइल का उपयोग बस अपने काम के लिए किया करो, और कुछ भी नहीं। सबसे जरूरी यह है कि आप इस समय जिसके लिए आए हो, उसमें पूरी तरह लग जाओ, अपने आप को पूरा बदल डालो। यहां किसके लिए ग्रुप बना रहे हो? अरे, बस अपना कल्याण करो। ये सब सुनेंगे, करेंगे नहीं — 99% लोग ऐसे हैं। आप बस एक के चक्कर में पड़ो — अपने आप के चक्कर में।

भाव वहीं रखो जहां कद्र हो

मुझे पता है, आपने जब बोला तो आपके अंदर मानवता थी; लेकिन वह मानवता किसी काम की नहीं — यही मानवता करते-करते हम भटक गए हैं। आपने मानवता के नाते बोला कि ये बच्चे हैं, इन्हें इंग्लिश समझ नहीं आ रही; लेकिन जिनके लिए बोला, उन्होंने भी आगे से नहीं कहा कि हां, हमें इंग्लिश समझ नहीं आ रही — वे पढ़े-लिखे थे, बोल सकते थे। आपके भाव की कद्र किसने की? एक आदमी भी आपकी तरफ से खड़ा नहीं हुआ।

ऐसी जगह भाव हमें फेंकना ही नहीं चाहिए, जहां हमारी कद्र न हो। केयर करनी है तो अपनी करो। सचेत हो जाओ। जब हमारी सही बात को रखा नहीं जाता, तो हमारा मानसिक स्तर गिरता है, व्यक्ति टूटता है। अपनी बात तब रखो जब सामने वाला समझे; नहीं तो मत रखो, बात ही खत्म करो।

जिसे समझना होता है, वह पूछता है

अगर किसी को समझना है, तो वह कहता है कि मुझे हिंदी करके बताओ, क्योंकि मुझे आपकी बात समझनी है। मैं भी बोलता हूं, लाइव में भी बोलता हूं कि भाई, आप इंग्लिश बोल रहे हो, मुझे समझ में नहीं आया, इसका हिंदी बोलिए तो मैं जवाब दे सकूं। जिसको सुनना होता है, जो आपकी बात की कद्र करता है, वह कहता है — मुझे समझ में नहीं आया, और भाषा में बताओ। और जिसको कद्र नहीं है, वह सुनेगा, हंसेगा और चला जाएगा, और जाकर फिर आपका मजाक उड़ाएगा।

जिसके लिए आए हो, वह करो

यहां रहना आपका अधिकार है; उस अधिकार को नहीं समझोगे तो जा सकते हो। आप तो जिसके लिए आए हो, वह करो; जाने दो जिसको जाना है। इसीलिए तो यहां किसी का नाम-वाम कोई पूछता नहीं है। जिसको जाना है जाए, जिसको रहना है रहे — बात खत्म।