प्रवचन PV02-0012 · भाग 2
थंबनेल पर धोखा मत दो — और गादी पर बैठने वालों की असली हालत
3 सितंबर 2026 · अपनी दिव्य ऊर्जा को कैसे बढा़ए ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान
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मुख्य बातें
- वीडियो में जिस विषय पर बात हुई है, ऊपर वही लिखो — थंबनेल पर किसी को धोखा मत दो।
- धोखा खाने वाले के अंदर से उस आदमी के लिए बद्दुआ और नेगेटिव वाइब्रेशन जाता है, और वो परेशान होता है।
- अपने को काम करना है, वायरल नहीं होना — काम को काम के तरीके से करना है।
- गादी पर बैठने वाले ऊपर से मूर्ति जैसे लगते हैं, अंदर से घुटन में हैं — क्योंकि जिस पद को स्वीकार किया, वो पद वाला काम ही नहीं किया।
- जिस लिए निकले थे वो किया नहीं, जो छोड़ के निकले थे उसी में उलझ गए — इतना तामझाम फैला के परेशान हैं।
वायरल नहीं, काम करना है
ऐसे ही चलेगा। कभी उस पर लाइक-शेयर का आदेश नहीं दिया जाएगा, सब्सक्राइब का आदेश नहीं दिया जाएगा। सीधा-सीधा काम होगा, और बैनर भी वही लगेगा जो वीडियो में है — घुमा-फिरा के नहीं। इतनी ईमानदारी से मैं काम करता हूं।
लोगों ने मुझे सलाह दी कि वीडियो वायरल करने के लिए ये लिख दो, वो लिख दो। मैंने बोला — नहीं भैया, अपने को काम करना है, वायरल नहीं होना है। अपने को काम को काम के तरीके से करना है।
थंबनेल का धोखा और बद्दुआ
आपने कभी-कभी देखा होगा कि बैनर पे, जिसे थंबनेल बोलते हैं, कुछ और रहता है और अंदर कुछ और। ऊपर ऐसा लिखा है कि 'यार, देख लो' — लेकिन देखने के बाद बड़ा गुस्सा आता है, और उस आदमी के लिए आपके अंदर से श्राप जाता है। क्योंकि आपके साथ गलत हो गया ना।
देखिए, वो आदमी कहीं बैठा है और आपके साथ गलत कर बैठा, फिर यहां से उसके लिए नेगेटिव वाइब्रेशन जाता है। फिर वो आदमी परेशान होता है कि मैंने तो कुछ नहीं किया, मैं परेशान क्यों हूं। थंबनेल में तूने कुछ और लिख दिया और अंदर कुछ और था — तू समझ नहीं रहा कि तेरे लिए कितनों की बद्दुआ आ रही है; बड़ी तेजी से तेरा बहुत बुरा हाल होने वाला है।
इसलिए वीडियो में जिस विषय पे आपने बात की है, जिस टॉपिक पे आपकी बात हुई है, वही टॉपिक ऊपर लिखिए। किसी को धोखा मत दीजिए।
भव्य आश्रम होता तो ऐसे सत्संग नहीं होते
मैं 12-13 साल से घूम रहा हूं। मैं चाहूं तो एक कपड़े पर पता नहीं कितना ले लूं — बस एक फोन पे कह दूं कि जिसकी इच्छा हो कर दे। ये कुटिया में प्लास्टिक नहीं टांगता, यहां भव्य आश्रम होता, गाड़ियां होतीं। लेकिन फिर हम लोग ऐसे सत्संग नहीं करते, शांति भी नहीं होती — फिर उनके अधीन रहना पड़ता। सीधी सी बात है।
गादी पर बैठने वालों की हालत
हम गादी पे मूर्ति की तरह बैठे नहीं रहते, हम सड़ते नहीं। वो ऊपर से लगता है — अंदर से गादी पे बैठने वाले बहुत सड़ रहे हैं। कभी उनसे एकांत में मिलो तब पता चलेगा — शारीरिक भी, मानसिक भी। तुम्हें लग रहा है कि इनकी बड़ी सेवा हो रही है; बड़ी दुर्गति हो रही है।
कुर्सी पर बैठने वाले को आप ऐसा मत समझो कि पंखा झुलाया जा रहा है। अंदर से वो इतनी घुटन में हैं, क्योंकि जिस पद को उन्होंने स्वीकार किया, वो पद वाला काम ही नहीं किया। वो वहां हैं ही नहीं — आप कह रहे हो कि ये काम हमारा देख लो, और उनका मस्तिष्क कहीं और घूम रहा है।
सियार की कहानी
एक गांव में सियार बहुत परेशान करता था — गन्ना खा लेना, ये खा लेना। गांव वालों ने कैसे भी करके एक को पकड़ लिया और मंदिर के सामने बांध दिया, और शर्त रख दी कि जो भी मंदिर में दर्शन करने आएगा, पहले इसको लात मारेगा और फिर प्रसाद खिलाएगा। रोज का काम हो गया। मार भी खा रहा है, भोजन भी कर रहा है — शरीर फूल गया, मोटा हो गया।
रात को एक सियार आया, एकदम पतला, भूखा। बोला — मेरी तो दुर्दशा है। उसने कहा — मैं तो भोग भोग रहा हूं; अब तो मैं भोग चुका हूं, एकदम मुक्त हो गया हूं; तुम मेरी जगह आ जाओ, तुम बच जाओ। वो सियार झांसे में आ गया। उसने अपनी रस्सी उसे पहना दी, गादी पर बैठा के निकल लिया। दूसरे दिन पता चला — लेकिन अब तो बंध गए हो; जब तक दूसरा नहीं मिलेगा, तब तक भाग नहीं पाओगे।
गांव में कितने लोग हैं — हर आदमी एक लात मार रहा है, प्रसाद भी मिल रहा है; पूरा शरीर सूजन है, ऊपर से मोटा दिख रहा है। यही हाल गादीपतियों का होता है। आप इसे साधारण ना समझिए — जाइए, अटैची ले जाइए और कुछ दिन उनके साथ रह के देखिए; आपसे ज्यादा वो परेशान हैं।
जिस लिए निकले, वो किया नहीं
इतना तामझाम फैला दिया — कितनी संपत्तियां, कितने ट्रस्टों के अधिपति हो गए — परेशान हैं। महंत, श्री-श्री लगाते-लगाते परेशान हैं; कितने श्री लगेंगे इनके नाम के आगे? बड़ी बुरी हालत है।
आपको लग रहा है कि लग्जरी कार में, अपने प्लेन में घूम रहे हैं। लेकिन जिस लिए निकले थे वो किया नहीं; जो छोड़ के निकले थे, उसी में उलझ गए। उलझ गए — लेकिन अब कहें किससे।