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प्रश्नोत्तर P14-0041 · भाग 14

गुरु जी, बाहर के पिंडों से मुक्त होने पर आत्मज्ञान होगा, और अपने शरीर से आसक्ति हटने पर ब्रह्मज्ञान — ये सही समझा?

हां, बाहर के रूप से मुक्त होगे तो आत्मज्ञान होगा, और जब इस रूप से (अपने शरीर से) मुक्त हो जाओगे तब ब्रह्मज्ञान होगा — ये है यात्रा। नाश नहीं, ये जीते जी होगा, इसी पिंड में होगा। आसक्ति का मतलब — इस शरीर को बचाना चाहता हूं, एकदम हृष्ट-पुष्ट रखना चाहता हूं। जैसे मादा एक बार गर्भ धारण करती है तो मां बनने की स्थिति में आ जाती है, फिर बच्चे को जन्म देती है तो मां बन जाती है — वैसे ही परमात्मा तक पहुंचने के लिए पहले अपने आप में, अपने अंदर पहुंचना पड़ेगा। बाहर से छूटोगे तो अंदर की सफाई होने लगेगी, और शरीर से मोह-आसक्ति खत्म हो जाएगी तो ब्रह्मज्ञान हो जाएगा। अभी तो बाहर से ही नहीं छुड़ा पाए, अनेक पिंडों से लेन-देन बाकी है — और तप में ये सब सीधा-सीधा, स्पष्ट दिखता है।

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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05