प्रश्नोत्तर P15-0139 · भाग 15
गुरुदेव भगवान, विचार जो चलते हैं वह अलग है, और जो मन बताता है वह अलग है?
नहीं, ऐसा नहीं है। मन शरीर की जरूरत बताता है; विचार देश-काल-स्थिति-परिस्थिति में आता है। जैसे मान लीजिए आप ध्यान करने बैठ गए और कोई सड़ा हुआ सामान लाके इधर रख दिया, आपको पता भी नहीं — जैसे आपने सूंघा, आपका विचार उस सुगंध-दुर्गंध में गया। आप ध्यान करने बैठे हो और कोई बाजा बजा दिया, संगीत लगा दिया, तो आपका ध्यान वहां गया; लेकिन आप बहरे हो तो नहीं गया। चलिए सुनाई दिया, लेकिन वो भाषा ही नहीं आती, तो बस साउंड आ रहा है इतना पता चलेगा। कहने का मतलब है, ज्ञानेंद्रियां, कर्मेंद्रियां अगर पूरी तरह काम कर रही हैं, तो जो भी हम बाहर से पाते हैं, वैसे विचार आने-जाने लगते हैं।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11