प्रश्नोत्तर P21-0058 · भाग 21
गुरु जी, डॉक्टर होने के नाते मरीज से तो मैं कह देता हूं कि अपनी तरफ से पूरा प्रयास करूंगा, बाकी ईश्वर कृपा। पर घर में बच्चों का आत्मविश्वास न गिरे इसलिए कहना पड़ता है "सब ठीक होगा, हम संभाल लेंगे" — क्या यह भी धोखा देना है?
आप उन्हें संभालने के लिए भरोसा दे रहे हो, उठाने के लिए भरोसा दे रहे हो — उनको यूज़ करने के लिए नहीं। भरोसा उनके लिए उनको दे रहे हो, ना कि उस भरोसे के द्वारा उनको यूज़ करना है; कहीं उनका आत्मविश्वास ना गिर जाए, वो टूट ना जाएं, इसलिए कहना पड़ता है "मैं हूं ना, हो जाएगा"। इससे तुम भी उठोगे, वो भी उठेंगे — ये बेईमानी नहीं है। अपने को पता है कि अपने हाथ में अगली सांस भी नहीं, लेकिन ये बात उन्हें अभी समझ नहीं आई है; तो मैं कह सकता हूं "तू चिंता मत कर, मैं हूं ना" — लेकिन मुझे पता होना चाहिए कि मैं संभावना में बात कर रहा हूं, क्योंकि हो सकता है मैं अगले पल शरीर में ना रहूं। भरोसा इसलिए दीजिए कि सामने वाला गिरे नहीं।
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