प्रश्नोत्तर P21-0158 · भाग 21
गुरु जी, नकली-असली, "मैं आत्मा हूं" — ये ढंग से समझ में नहीं आया; थोड़ा उदाहरण के साथ समझाइए।
जैसे पानी से बर्फ बना — बर्फ नकली है, पानी असली है; लेकिन बर्फ किसी कारण से बना। वो कारण हटाओगे तो बर्फ का नाश हो जाएगा और वो मूल पानी में आ जाएगा। कारण क्या है — फ्रिज, या ज्यादा ठंडा; तो फ्रिज में से निकालना पड़ेगा या उसका कनेक्शन काटना पड़ेगा। वैसे ही आत्मा इच्छा-अपेक्षा में जीवात्मा हो गई है — कामनाओं-वासनाओं के चक्कर में; उनका मुझे त्याग करना पड़ेगा। जब इच्छा-अपेक्षा छोड़ेंगे तो जीव का नाश हो जाएगा, तब मैं आत्मा को — अपने आप को — देख पाऊंगा। नकली का मतलब बनाया हुआ; जब बनाया हुआ मिटाओगे तब असली प्रत्यक्ष हो जाएगा। अभी देखना चाहो तो नहीं देख पाओगे — तभी देख पाओगे जब इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो जाओगे। जैसे 24 कैरेट सोना चैन बन गया — चैन तभी बना जब उसमें कुछ मिक्स किया; फिर से सोने में देखना है तो उसे तपाना पड़ेगा, आकार का नाश करना पड़ेगा, मिलाई हुई धातु निकालनी पड़ेगी, तब वो पूर्ण सोने में आएगा। वैसे ही आत्मा से जीवात्मा हो गया है तो मैंने उसमें कुछ मिला दिया है — और वो बेईमानी के द्वारा मिलाया है; उसको निकालना पड़ेगा, नहीं तो पूर्ण रूप से नहीं देख पाओगे, पूर्ण आनंद में नहीं हो पाओगे।
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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06