प्रश्नोत्तर P21-0161 · भाग 21
गुरु जी, ब्रह्म ज्ञान पाने के लिए क्या करें, कौन सी दीक्षा चाहिए?
पहले तो आत्मज्ञान — ब्रह्म ज्ञान तो छोड़ो। आत्मज्ञान के लिए जहां पे आप हो वहां से छुड़ाने के लिए काम करना पड़ेगा — निर्विकार होना पड़ेगा; राग-द्वेष, मोह-आसक्ति, इच्छा-अपेक्षा, मेरा, कर्ता से कैसे मुक्त हो जाऊं, उसके लिए काम करना पड़ेगा। उसके लिए सर्वप्रथम पहले ईमानदार हो। आप बोल सकते हो कि आप ईमानदार हो? या तो मैं बेईमान हूं या ईमानदार — "कुछ-कुछ" की बात नहीं होती; या तो आदमी मर गया या जिंदा है, या रात है या दिन। हां, मैं बेईमान हूं, लेकिन इस बेईमानी को छोड़कर ईमानदार भी हो सकता हूं — तो सर्वप्रथम ईमानदारी का संकल्प लीजिए, अभी ले सकते हैं तो अभी ले लो। इसी भ्रम में जिंदगी चली जाती है कि मैं थोड़ा-थोड़ा बेईमान हूं — नाव में चाहे एक छेद हो चाहे 99, परिणाम दोनों का एक ही आएगा; 99 वाला पहले डूबेगा, तुम बाद में, लेकिन मिलोगे एक ही जगह। आध्यात्म की शुरुआत ही है सर्वप्रथम ईमानदारी — जैसे स्कूल में नाम ना लिखाया हो और क्लास में जाके बैठो तो डिग्री नहीं मिलेगी; आध्यात्म में नाम लिखाना है ईमानदारी। जैसे ही ईमानदारी अपनाई, विकारों वाला बंधन बंधना बंद हो गया — पर इससे मुक्ति नहीं हो रही, उसके लिए सत्कर्म अपनाना पड़ेगा, क्योंकि जितना बंधन बांधा उसको छुड़ाओगे कैसे। ईमानदारी अपनाई तो आप आध्यात्मिक हो; आत्मिक कल्याण करना है तो सत्कर्म अपनाओ। और अगर ईमानदारी पूरी तरह नहीं अपनाई तो ना आपके प्रश्न का मतलब, ना मेरे उत्तर का, ना मंदिर जाने का, ना माला जपने का — सब आपके पतन का कारण बनेगा। ईमानदारी अपनाना आपके हाथ में है।
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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06